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जानिए मुर्गियां कैसे बदल रही है किसानों की किस्मत

पूरे राजस्थान में मुर्गीपालन में झुंझुनूं जिला अब अव्वल होने लगा है। यहां करीब 400 मुर्गी फार्म है। प्रत्यक्ष रूप से 150 करोड़ रुपए से ज्यादा का वार्षिक कारोबार हो रहा है। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट, दवा, फीड सहित अनेक अप्रत्यक्ष कारोबार भी पनप रहे हैं।

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जानिए मुर्गियां कैसे बदल रही है किसानों की किस्मत

जानिए मुर्गियां कैसे बदल रही है किसानों की किस्मत


राजेश शर्मा
झुंझुनूं. सूर्योदय से पहले मानव को जगाने वाले मुर्गे और मुर्गियां अब झुंझुनूंवासियों की तकदीर बदल रहे हैं। मुर्गीपालन आय का बड़ा जरिया बन गया है। जिले में मुर्गीपालन का सालाना कारोबार एक अरब पचास करोड़ रुपए को पार कर गया है। एक साल में केवल अंडों से पचास करोड़ रुपए की आय हो रही है। इसके अलावा सौ करोड़ से ज्यादा रुपए के चिक्स व मुर्गे भी बिक रहे हैं।
वर्ष 1995 से पहले मुर्गीपालन केवल घरेलू आपूर्ति के लिए किया जाता था। इसमें मुनाफा होने लगा तो मुर्गीपालन कारोबार का रूप लेने लग गया। अब मुर्गी फार्मों की संख्या जिले में करीब चार सौ हो गई है। जिले में ऐसी कोई तहसील नहीं है, जहां मुर्गी फार्म नहीं हो। मुर्गी फार्म की दवा व फीड का कारोबार भी करोड़ों रुपए में पहुंच गया है। अंडों के उत्पादन में पूरे राजस्थान में अजमेर अभी भी पहले स्थान पर है, जबकि ब्रायलर व चिक्स के उत्पादन में झुंझुनूं जिला पहले स्थान पर पहुंच गया है। मुर्गियों की बीट भी खेतों को उपजाऊ बना रही है। हालांकि कई जगह दुर्गंध व अन्य कारणों से कई बार इनका विरोध भी हुआ है।

#poultry farming in jhunjhunu
यहां बेच रहे
जयपुर, जोधपुर, दिल्ली, गुरुग्राम और उत्तरप्रदेश में झुंझुनूं के अंडों व मुर्गों की सबसे ज्यादा मांग है।

बड़ी कम्पनियां भी आई
जिले में मुर्गीपालन के बढ़ते व्यवसाय को देखकर इस क्षेत्र से जुड़ी बड़ी कम्पनियां भी यहां आ गई है। वे किसानों के साथ कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग कर रही है। खेत में रुपए कम्पनी लगा रही है। फीड, दवा व चूजे भी कम्पनी ला रही है। किसानों को वार्षिक पैकेज मिल रहा है। घाटा और मुनाफा दोनों कम्पनियों के मालिकों का हो रहा है। इसके अलावा अलग-अलग कम्पनियों की अलग-अलग शर्तें हैं। इसे स्थानीय भाषा में इंटीग्रेशन सिस्टम बोल रहे हैं।

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जानिए पूरी गणित
कुल मुर्गी फार्म 400
कितने लोगों को रोजगार 5000
कितने रुपए के अंडे 50 करोड़
कितने रुपए के मुर्गे 100 करोड़

अप्रत्यक्ष रोजगार
-मुर्गी की दवा व टीके
-पशुचिकित्सक
-मुर्गी आहार का कारोबार
-ट्रांसपोर्ट

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तीन तरह के मुर्गी फार्म
लेयर फार्म-यहां अंडे का उत्पादन होता है।
ब्रायलर फार्म-चिक्स के लिए मुर्गीपालन।
हेचरी फार्म- चूजे का उत्पादन।

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एक्सपर्ट व्यू

पूरे राजस्थान में मुर्गीपालन में झुंझुनूं जिला अब अव्वल होने लगा है। यहां करीब 400 मुर्गी फार्म है। प्रत्यक्ष रूप से 150 करोड़ रुपए से ज्यादा का वार्षिक कारोबार हो रहा है। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट, दवा, फीड सहित अनेक अप्रत्यक्ष कारोबार भी पनप रहे हैं। बड़ी कम्पनियां भी झुंझुनूं में आकर इंटीग्रेशन सिस्टम से मुर्गीपालन करवा रही है।
-कृष्ण कुमार गावडिय़ा, जिला अध्यक्ष, पोल्ट्री एसोसिएशन झुंझुनूं


जोखिम भी खूब

मुर्गीपालन में जोखिम भी खूब हैं। मुर्गियों में अनेक रोग भी तेजी से फैलते हैं। टीकाकरण व साफ-सफाई बहुत जरूरी है। सॢदयों से बचाने के लिए कृत्रिम लाइट लगाते हैं। लेकिन यह ज्यादा भी नुकसान करती है और कम भी। औसत ही रखनी चाहिए। कोरोना में देसी मुर्गियों के अंडों की मांग खूब बढ़ी है।
-डॉ प्रमोद कुमार, प्रभारी, पशु विज्ञान केन्द्र झुंझुनूं