
कलाकृति बनाती प्रियंका जांगिड़।
राजस्थान के झुंझुनूं जिले के बगड़ कस्बे की रहने वाली प्रियंका जांगिड़ रद्दी कागज की लुगदी, मुल्तानी मिट्टी, लकड़ी के बोर्ड व अन्य सामग्री से कलाकृतियां बना रही है।
प्रियंका ने बताया कि वर्ष 2018 में डिजाइनिंग व मोराल क्ले आर्ट की ट्रेनिंग ली। इसके बाद प्लास्टर ऑफ पेरिस व सफेद सीमेंट से कलाकृतियां बनाना शुरू किया। लेकिन यह इको फ्रेंडली नहीं होने तथा सीमेंट से हाथ खराब होने के कारण इसकी जगह मोराल क्ले आर्ट शुरू किया। महिला अधिकारिता विभाग से जुड़कर स्वयं सहायता समूह बनाया। प्रियंका पेन स्टेंड, फ्लॉवर पॉट, पेंटिंग, किचन हॉल्डर सहित अनेक प्रकार की कलाकृतियां बना रही है। वह अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई है।
बचपन का शौक
दिल्ली में उसकी कलाकृतियों की सबसे ज्यादा मांग है। इसके अलावा वह राजस्थान पुलिस, सत्यमेव जयते, उपहार सामग्री सहित कई सरकारी विभागों के लोगो की डिजाइन को मोराल आर्ट में बना रही है। वह अपने साथ लगभग पच्चीस महिलाओं को रोजगार दे रही है। हर साल खर्चा निकालने के बाद चार से पांच लाख रुपए की बचत कर लेती है। प्रियंका ने बताया कि उसका पीहर नवलगढ़ के पास झाझड़ गांव में है। गांव में भी वह बचपन में सहेलियों के साथ मिलकर मिट्टी के खिलौने व अन्य कलाकृतियां बनाती थी। शादी के बाद पति रोहित व अन्य भी उसकी मदद कर रहे हैं। वह शिक्षा विभाग तथा महिला अधिकारिता विभाग सहित अनेक संस्थाओं से सम्मानित हो चुकी।
इनका कहना है
प्रियंका मोराल आर्ट से डिजाइनर वस्तुएं बना रही हैं। महिला स्वयं सहायता समूह बनाकर अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे रही है। विभाग भी उसे पुरस्कृत कर चुका।
-विप्लव न्यौला, उप निदेशक, महिला अधिकारिता विभाग, झुंझुनूं
Published on:
02 Jan 2024 10:35 pm
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