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गांव से पढ़कर 10वीं में मेरिट में आईं, जानिए राजस्थान में SDM सुप्रिया कालेर की सफलता का राज

Ras Supriya success story: बचपन से मेरा सपना प्रशासनिक अधिकारी बनने का रहा है। जब मैं दसवीं में पढ़ती थी, उस समय स्टेट मेरिट की घोषणा होती थी। घांघू गांव से पढ़कर दसवीं में पूरे राजस्थान में ग्यारहवें नम्बर पर रही।

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Ras Supriya success story: बचपन से मेरा सपना प्रशासनिक अधिकारी बनने का रहा है। जब मैं दसवीं में पढ़ती थी, उस समय स्टेट मेरिट की घोषणा होती थी। घांघू गांव से पढ़कर दसवीं में पूरे राजस्थान में ग्यारहवें नम्बर पर रही। साइंस मैथ के साथ सीकर से बारहवीं की। इसके बाद चयन आईआईटी रुड़की में हो गया। वहां से केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। लेकिन सपना प्रशासनिक अधिकारी बनने का था, इसलिए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुट गई। दिन रात मेहनत की। परिणाम सामने है।


यह कहना है राजस्थान प्रशासनिक सेवा की अधिकारी एवं वर्तमान में झुंझुनूं जिले के मंडावा की उपखंड अधिकारी सुप्रिया कालेर का। वर्ष 2019 के बैच की अधिकारी सुप्रिया की आल राजस्थान में 55 वीं रेंक आई। चूरू के श्योदानपुरा गांव में जन्मी सुप्रिया ने बताया कि उसे आगे बढ़ाने में पिता शीशराम व मां विजयलक्ष्मी का सबसे महत्वपूर्ण योगदान रहा। प्रशासनिक सेवा में रहते हुए वह चाहती है कि उसके पास कोई भी पीडि़त व्यक्ति आए तो उसे मिलने के लिए लम्बा इंतजार नहीं करना पड़े। उसे ऐसा नहीं लगे की उसकी कहीं सुनवाई नहीं हो रही। वह दफ्तर से चेहरे पर मुस्कान लेकर जाए।


युवाओं के लिए संदेश

-मेहनत नियमित जरूरी है, ऐसे नहीं हो कि एक दिन जमकर पढाई कर ली, दूसरे दिन समय पर जगे ही नहीं।

-अपना लक्ष्य तय कर लें, उसके अनुरूप मनपसंद विषय लेकर तैयारी करें।

-हमेशा सकारात्मक सोचें।


सुझाव

एक महिला के लिए बार-बार ट्रांसफर से गुजरना काफी पीड़ादायक रहता है। मेरा डेढ साल का बच्चा है। पति दूसरे जिले में नौकरी करते हैं। जब लाडनूं में उपखंड अधिकारी थी, तभी विधानसभा के चुनाव थे, कई बार ऐसा हुआ जब रात को ड्यूटी लग गई। रात बारह बजे भी डेढ साल के बच्चे को साथ ले जाना पड़ा। ऐसे में सरकार का प्रयास रहे कि पति-पत्नी की डयूटी एक ही जिले में हो तो सभी कामकाजी महिलाओं को राहत मिल सकती है। बच्चों की परिवरिश के लिए किसी अपने का साथ होना बहुत जरूरी है।

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