
राजेश शर्मा। झुंझुनूं. 'मैं मेरा दर्द तो सह लूंगी... लेकिन जनता का दर्द नहीं देखा जाता। डॉक्टर इसीलिए बनी हूं कि दुख और संकट के समय जरूरतमंद की सेवा कर सकूं।' यह कहना है डॉ उपासना चौधरी का। उपासना के पैर में चोट लगी है। पट्टा बांध रखा है। सही तरीके से चला भी नहीं जाता, लेकिन लगातार दर्द निवारक दवा लेकर जनता की सेवा कर रही है।
झुंझुनूं के भोजासर गांव की बेटी और घूमनसर गांव की बहू उपासना अभी पीडीयू मेडिकल कॉलेज एवं राजकीय डेडराज भरतिया चिकित्सालय चूरू में कार्यरत है। उसकी ड्यूटी अभी वहां रेपिड रेस्पोंस टीम (आरआटी) में है। पिछले दिनों चिकित्सा मंत्री डॉ रघु शर्मा को अपना एक माह का वेतन भी दे चुकी। उपासना ने बताया कि इसके लिए उसके पति भारतीय सिविल सेवा में कार्यरत अमित गेट उत्साहवर्धन कर रहे हैं। उपासना मेडिकल टीम में कार्य करने के अलावा आमजन को कोरोना के प्रकोप से बचाने के लिए जागरूक भी कर रही है।
बांट रही मास्क और दवा
उपासना ने बताया कि वह चूरू में रह रही है। हर दिन जरूरतमंद परिवारों को मास्क व दवा भी बांट रही है। पिछले दिनों सड़क हादसे में उसके घुटने में चोट लग गई थी।
कोरोना से लडऩे के लिए हर ग्राम पंचायत को दिए 50 हजार
झुंझुनूं. लोकडाउन के चलते ग्राम स्तरीय कर्मचारियों को मास्क व सेनिटाइजर की आवश्यकता के मध्यनजर सभी पंचायत समितियों को ऐसी आवश्यक सामग्री खरीदकर ग्राम पंचायत स्तर पर उपलब्ध करवाने के आदेश जारी किए गए हैं। जिला परिषद सीइओ रामनिवास जाट ने बताया कि प्रत्येक ग्राम पंचायत अपने फंड से 50 हजार रुपए तक का खर्चा कोरोना आपदा के दौरान सर्वे तथा सहायता में लगे ग्राम स्तरीय कर्मचारियों के लिए मास्क, सेनिटाइजर, साबुन, सोडियम हाइपोक्लोराइड आदि मुहैया कराने के लिए कर सकते हैं। जो कर्मचारी स्वयं के स्तर पर रुमाल, मास्क, साबुन आदि खरीदकर ग्राम पंचायत को बिल देंगे, उन्हें अधिकतम 500 रुपए तक का भुगतान ग्राम पंचायत की ओर से कर दिया जाएगा।
Updated on:
11 Apr 2020 11:53 am
Published on:
11 Apr 2020 11:21 am
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