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शादी के 14 साल बाद झुंझुनूं की मुक्ता कैसे बनी राजस्थान की टॉपर, जानिए उन्हीं की जुबानी

लक्ष्य निर्धारित करो। नियमित पढाई करो। सफलता अवश्य मिलेगी। शादी के बाद भी कॅरियर संभव है। उम्र की सीमा कोई बाधक नहीं बनती। मैं संभवत सबसे ज्यादा उम्र की महिला हूं जो राजस्थान की टॉपर बनी हूं। पीहर पक्ष के साथ ससुराल पक्ष ने पूरा सहयोग किया।

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शादी के 14 साल बाद झुंझुनूं की मुक्ता कैसे बनी राजस्थान की टॉपर, जानिए उन्हीं की जुबानी

शादी के 14 साल बाद झुंझुनूं की मुक्ता कैसे बनी राजस्थान की टॉपर, जानिए उन्हीं की जुबानी

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दस साल तक निजी सैक्टर में की नौकरी


राजेश शर्मा

झुंझुनूं. शादी के बाद भी कॅरियर संभव है। मेरी शादी को चौदह वर्ष हो गए। मेरा दस साल का बेटा है। मैं चालीस वर्ष की हो गई। लेकिन मैंने लक्ष्य तय किया और उसी के अनुरूप पढाई जारी रखी। परिवार ने सपोर्ट किया। अब नतीजा सामने है पूरे राजस्थान में टॉपर रही हूं।
यह कहना है राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से घोषित राजस्थान प्रशासनिक सेवा(आरएएस) के परिणाम में पूरे राज्य में प्रथम रही चिड़ावा की बेटी मुक्ता राव का।
मुक्ता ने राजस्थान पत्रिका को पहला साक्षात्कार देते हुए बताया कि मैंने स्वामी विवेकानंद का ध्येय वाक्य याद रखा। उठो जागो और तब तक मत रुको जब तक सफलता नहीं मिल जाए। लक्ष्य तय करो और उसे पूरा करने में जुट जाओ। दिन रात एक कर दो। सपना भी सफलता का ही देखो। मैंने दस साल निजी सैक्टर में आईटी कम्पनी में कार्य किया। इस दौरान मोहाली, गुरुग्राम व मैसूर सहित अनेक जगह कार्य किया। फिर नौकरी छोड़ दी। वर्ष 2015 से आरएएस की तैयारी शुरू की। वर्ष 2016 में मेरी 848 वीं रैंक आई। फिर तैयारी जारी रखी। हर दिन चार से पांच घंटे नियमित पढाई की। मन से करो तो यह पढाई पर्याप्त होती है।
पिता महेन्द्र सिंह खेती करते हैं। मां मंजू देवी का निधन हो चुका। ससुराल सीकर जिले के नेतड़वास गांव में है। अभी परिवार सहित जयपुर रहती हूं। इधर बेटी की सफलता पर चिड़ावा में पिता व परिवार के सदस्यों ने मिठाई बांटी। वहीं जयपुर में बहन ज्योतिराव, नंदकिशोर पूनिया व अन्य ने मुक्ता को मिठाई खिलाई।

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दादा ने लड़ी थी आजादी की जंग

नंदकिशोर पूनिया व मुक्ता की बहन ज्योति राव ने बताया कि मुक्ता के दादा रक्षपाल सिंह राव स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने आजादी की जंग लड़ी थी। देश की आजादी के लिए वे अनेक जेलों में रहे थे। उनका निधन हो चुका। अब स्वतंत्रता सेनानी की पौत्री मुक्ता ने नया रेकॉर्ड बनाया है। मुक्ता के पति मणीपाल विवि में कम्प्यूटर साइंस विभाग के निदेशक हैं। पति के अलावा ससुराल पक्ष के सभी सदस्यों ने भी परीक्षा की तैयारी में पूरा सहयोग किया।

शिक्षा: प्रारंभिक शिक्षा डालमिया स्कूल चिड़ावा में हुई। इसके बाद चिड़ावा कॉलेज चिड़ावा से बीएएसी की। राजस्थान विवि से एमसीए किया। एमसीए के दौरान भी पूरे राजस्थान में टॉपर रही।

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संदेश:
लक्ष्य निर्धारित करो। नियमित पढाई करो। सफलता अवश्य मिलेगी। शादी के बाद भी कॅरियर संभव है। उम्र की सीमा कोई बाधक नहीं बनती। मैं संभवत सबसे ज्यादा उम्र की महिला हूं जो राजस्थान की टॉपर बनी हूं। पीहर पक्ष के साथ ससुराल पक्ष ने पूरा सहयोग किया।

सपना:
समाज की अंतिम पंक्ती में बैठे व्यक्ति को सरकारी योजनाओं का फायदा मिले। सरकारी योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन हो। महिलाओं को सुरक्षा का माहौल मिले।


परेशानी:
सच बोलूं तो परेशानी कोई नहीं आई। बस परीक्षाओं के परिणाम सही समय पर आने चाहिए। सोशल मीडिया के फायदे व नुकसान दोनों हैं। आप पर निर्भर करता है आप अपने कॅरियर को संवारने के लिए उसे सही तरीके से फायदा कैसे ले सकते हैं।

चौथे नंबर पर झुंझुनूं का बेटा निखिल पोद्दार


झुंझुनूं. राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से घोषित राजस्थान प्रशासनिक सेवा(आरएएस) के परिणाम में पूरे राज्य में झुंझुनूं की बेटी मुक्ता राव के प्रथम आने के बाद जश्न मनाया गया। मिठाई बांटी गई। खास बात यह है कि पहले स्थान पर जहां बेटी मुक्ता राव रही, वहीं चौथे स्थान पर भी झुंंझुनूं का डंका बजा। चौथे पर निखिल कुमार रहा। वहीं एक ही परिवार के दो सदस्य भी आरएएस बने हैं। डॉ नंदकिशोर पूनिया व ज्योति राव ने बताया कि मुक्ता राव के पहले स्थान पर आने पर जश्न मनाया गया। वहीं मुक्ता की छोटी बहन के पति मुकेश धनकड़ भी आरएएस बने हैं। मुकेश मूलत किठाना गांव के रहने वाले हैं। अभी चिड़ावा में चूंगी चौकी के पास रहते हैं। इनके अलावा भी अनेक बेटे-बेटियों को आरएएस में सफलता मिली है।
आरएएस की परीक्षा में राजस्थान में चौथे नंबर पर रहा निखिल झुंझुनूं जिले के गुढ़ागौडज़ी का रहने वाला है। उसके पिता का हार्डवेयर का व्यापार है। निखिल शुरू से ही पढऩे में होशियार रहा है

झुंझुनूं पूरे राज्य में नया रेकॉर्ड

शिक्षा में अव्वल झुंझुनूं के लाडलों ने एक बार फिर झुंझुनूं का मस्तक ऊंचा किया है। टॉप दस में झुंझुनूं ऐसा जिला है जहंा के दो युवा आए हैं। इसके अलावा जयपुर से भी तीन टॉपर आए हैं। जयपुर व झुंझुनूं को छोड़कर बाकी किसी जिले ने यह कारनामा नहीं किया।


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