Hanuman Jayanti 2023: चूरू जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध Salasar Balaji Mandir परिसर में बारह माह प्रज्जवलित रहने वाले बाबा मोहनदासजी की धूणे में झुंझुनूं की गोपाल गोशाला के गोबर से बनी थेपडि़यां भी काम में ली जाती है। वैसे तो धूणे में सालासर, आस-पास के गांवों सहित अनेक जगह से थेपडि़यां काम में ली जाती हैं। इसके साथ ही कई वर्ष से झुंझुनूं शहर की गोपाल गोशाला से भी पिकअप भरकर थेपडि़यां वहां जाती है।
इसके लिए महिलाएं गोशाला में थेपडि़यां (उपले) बनाती रहती हैं। इससे महिलाओं को भी रोजगार मिला हुआ है। सालासर जाने वाले श्रद्धालुओं में अधिकतर धूणे पर जरूर जाते हैं। मंदिर में घुसते ही प्रतिमा से पहले धूणा आता है। नारियल का प्रसाद यहीं पर चढ़ाया जाता है।
कई वर्ष से अखंड चल रहा धूणा:
सालासर बालाजी मंदिर की स्थापना मोहनदास महाराज ने विक्रम संवत 1811 में श्रावण शुक्ल नवमी को की थी। ऐसी मान्यता है कि मोहनदास की भक्ति से प्रसन्न होकर हनुमानजी आसोटा में मूर्ति रूप में प्रकट हुए। तत्पश्चात मूर्ति को बैलगाडी से सालासर लेकर आए। जहां बैल आकर रुके, उसी जगह प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की गई। विक्रम संवत 1811 से ही मंदिर परिसर में मोहनदास का धूणा प्रज्जवलित हो रहा है। मंदिर का निर्माण विक्रम सम्वत 1815 में करवाया गया था।
इनका कहना हैमंदिर का धूणा अखंड़ प्रज्जवलित रहता है। कई जगह से थेपडि़यां मंगवाते हैं। झुंझुनूं से जो डालते हैं उनका स्वागत है।
-बनवारी लाल, मंदिर पुजारी सालासर
कई वर्ष से सालासर बालाजी मंदिर के धूणे के लिए पिकअप भरकर थेपडि़यां भेजते हैं। यहां महिलाएं गायों के गोबर से ऐसी थेपडि़यां बनाती रहती हैं।
नेमीचंद अग्रवाल, मंत्री, गोपाल गोशाला झुंझुनूं