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खेतड़ीनगर में था सीआइएसएफ का ट्रेनिंग सेंटर, प्लांट के साथ वह भी बंद हो गया

हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड की 1967 में स्थापना हुई तो सुरक्षा का जिम्मा 1971 में सीआइएसएफ ने संभाल लिया था। वर्ष 1998-99 में सीआइएसएफ को एचसीएल प्लांट से हटा लिया गया। जब सीआइएसएफ यहां तैनात थी, तब तक चोरों को भी भय था, लेकिन हटते ही चोरियां भी अधिक होने लगी। कस्बे के निकट सीआइएसएफ का ट्रेनिंग सेंटर भी बनाया गया था।

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खेतड़ीनगर में था सीआइएसएफ का ट्रेनिंग सेंटर, प्लांट के साथ वह भी बंद हो गया

खेतड़ीनगर में था सीआइएसएफ का ट्रेनिंग सेंटर, प्लांट के साथ वह भी बंद हो गया

झुंझुनूं/खेतड़ीनगर. खेतड़ी कॉपर कॉम्पलेक्स के जब सभी प्लांट चालू थे, तब केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआइएसएफ) के पास इसकी सुरक्षा का जिम्मा था। सुरक्षा अभेद्य थी। खेतड़ीनगर में सीआइएसएफ का ट्रेनिंग सेंटर भी था। कालांतर में जैसे-जैसे केसीसी के प्लांट बंद होते गए, सीआइएसएफ के ट्रेनिंग सेंटर पर भी ताले लगा दिए गए।

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हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड की 1967 में स्थापना हुई तो सुरक्षा का जिम्मा 1971 में सीआइएसएफ ने संभाल लिया था। वर्ष 1998-99 में सीआइएसएफ को एचसीएल प्लांट से हटा लिया गया। जब सीआइएसएफ यहां तैनात थी, तब तक चोरों को भी भय था, लेकिन हटते ही चोरियां भी अधिक होने लगी। कस्बे के निकट सीआइएसएफ का ट्रेनिंग सेंटर भी बनाया गया था। जवानों के लिए आवास बनाए गए थे। 50-50 जवानों के रहने के लिए हॉल बनाए गए थे। अब टूटे-फूटे हॉल तो मौजूद हैं, लेकिन नहीं है तो उनमें रहने वाले जवान। अब सुरक्षा का जिम्मा निजी कंपनी को दे रखा है।
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सवा चार सौ से ज्यादा जवान करते थे सुरक्षा
सीआइएसएफ के जवान व अधिकारियों की संख्या करीब सवा चार सौ से ज्यादा होती थी। वर्ष 1987-88 में यहां पर अडोप ट्रेनिंग सेंटर भी बनाया गया था। एक बैच में 150 जवानों को ट्रेनिंग दी जाती थी। करीब नौ माह की ट्रेनिंग पूरी करवाई जाती थी। ट्रेनिंग देने के लिए जवानों के लिए मैदान व बीम लगाने व कसरत के सामान अभी भी स्मृति के रूप में शेष हैं।
बास्केटबॉल की टीम थी
सीआइएसएफ के जवान बास्केटबॉल के अच्छे खिलाड़़ी थे। अन्य लोग भी उनसे बास्केटबॉल सीखते थे। पूर्व असिस्टेंट कमांडेंट लाभचंद शर्मा के नेतृत्व में टीम ने कई बार पदक भी जीते।
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वर्ष 1971 से 1999 तक सीआइएसफ के पास सुरक्षा का जिम्मा था। 425 जवान व अधिकारी सुरक्षा करते थे। ट्रेनिंग सेंटर भी बनाया गया था। उस समय तक एचसीएल पूरे परवान पर था। सुरक्षा बंदोबस्त भी कड़ा हुआ करता था। सरकार को फायदा भी खूब हो रहा था। सरकार को अपने इस रत्न को बचाने के लिए पहल करनी चाहिए। फिर से सभी प्लांटों को चलाना चाहिए।
-लाभचंद शर्मा, पूर्व असिस्टेंट कमांडेंट सीआइएसएफ
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केसीसी के लिए चिड़ावा में भी शुरू हुआ अभियान
चिड़ावा. राजस्थान पत्रिका के अभियान खेतड़ी:लौटाओ तांबे की चमक को आमजन का पूरा समर्थन मिल रहा है। केसीसी को बचाने के लिए खेतड़ीनगर के बाद चिड़ावा में भी अभियान शुरू हो गया है। इस संबंध में भाजपा युवा मोर्चा की ओर से नायब तहसीलदार महेंद्र मंूड को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। जिला उपाध्यक्ष आशीष डांगी के नेतृत्व में सौंपे ज्ञापन में बताया कि केसीसी में भरपूर मात्रा में तांबा होने के बावजूद अधिकरियों की गलत नीतियों के चलते इसे बंद कर दिया गया। जिससे हजारों लोगों का रोजगार छिन गया। वहीं करोड़ों-अरबों की मशीनरी धूल फांक रही है। उन्होंने केसीसी को फिर से आधुनिक तकनीक से जोड़कर चालू करवाने की मांग की है। जिससे शेखावाटी समेत देशभर के हजारों युवाओं को रोजगार मिल सके। वहीं तांबा उत्पादन में देश आत्मनिर्भर बन सके। ज्ञापन देने वालों में प्रीतम फौजी देवरोड, विक्रम सुंदरिया, सतीश सोमरा, सतेंद्र कुमार, इंद्राज फोगाट, विकास कुल्हरी, सत्यपाल धनखड़ आदि मौजूद थे।