
शहीद होने से पहले कहा था मां, अभी देश सेवा में हूं, शादी बाद में
झुंझुनूं. छुट्टी बिताने के बाद जब छत्रपाल सिंह ड्यूटी पर जा रहा था तब भी मां ने कहा कि बेटा अब शादी की उम्र हो गई। जल्द शादी करवा देते हैं। तब उसने कहा कि अभी सरहद पर जाना जरूरी है। अगली बार आऊंगा तक शादी की बात करेंगे। फिलहाल मेरे लिए देश की सेवा सबसे पहले है। उसने अंतिम बार 3 अप्रेल को अपनी मां से बात की थी। जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कमाण्डर परवेज अहमद हुसैन ने बताया कि छत्रपाल सिंह 29 दिन की छुट्टी बिताने के बाद 9 मार्च को ही वापस अपनी ड्यूटी पर लौटे थे। 23 वर्ष के छत्रपाल सिंह पीटीआर पद पर कार्यरत थे। अभी अविवाहित थे। 4 पैरा (एसएफ) में तैनात थे। पिता सुरेश कुमार की गांव में ही मेडिकल की दुकान है। वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के हैं, लेकिन करीब 25-30 वर्ष से छावसरी रह रहे हैं।
लाडले की अंतिम विदाई में आडे नहीं आया कोरोना का भय, सैकड़ों लोग उमड़े
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गुढागौडज़ी(झुंझुनूं). जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हुए छावसरी गांव के लाडले छत्रपालसिंह की अंत्येष्टि उनके पैतृक गांव में सोमवार शाम को पूर्ण राजकीय सम्मान से की गई। कोरोना के भय के बावजूद लाडले की अंतिम विदाई में सैकडों लोग उमड़े। वे रविवार सुबह कुपवाड़ा में शहीद हो गए थे। गांव में जैसे ही लाडले का पार्थिव देह पहुंची तो भारत माता के जयकारों से गांव की गलियां गूंज उठी। घर में अंतिम सामाजिक क्रिया करने के बाद छावसरी के मुख्य बस स्टेण्ड पर शहीद की अंत्येष्टि की गई। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण उमड़े। शहीद के भाई सूर्य प्रकाश ने मुखाग्नि दी तो हर किसी की आंखें छलक उठी। पुलिस के जवानों ने शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इस दौरान शहीद के परिजन, ग्रामीण सहित उपखण्ड अधिकारी राजेन्द्र सिंह, पुलिस उपाधीक्षक रामचन्द्र मूंड, गुढा एसएचओ राजेन्द्र शर्मा भी उपस्थित रहे।
कलक्टर-एसपी ने पुष्पचक्र अर्पित किए
सेना के विशेष हेलीकॉप्टर से शहीद की पार्थिव देह झुंझुनूं स्थित हवाई पट्टी पर लाई गई। यहां जिला कलक्टर यूडी खान व एसपी जेसी शर्मा, उपखण्ड अधिकारी सुरेन्द्र यादव, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कमाण्डर परवेज अहमद हुसैन, कोतवाल गोपाल ढाका, पीएमओ डॉ. शुभकरण कालेर ने शहीद की प्रार्थिव देह पर पुष्प चक्र अर्पित किए। इसके बाद वाहन से देह को गांव छावसरी ले जाया गया।
जनप्रतिनिधि रहे दूर
अधिकारी और आमजन तो अंत्येष्टिस्थल पर मौजूद रहे। हवाई पट्टी पर कलक्टर/एसपी ने भी पुष्पचक्र अर्पित किए। लेकिन कोरोना के कारण व धारा 144 के चलते जिले के बड़े जनप्रतिनिधियों ने शहीद की अंत्येष्टि से दूरी बनाए रखी।
परिजनों की मांग
- गांव के सरकारी विद्यालय का नामकरण शहीद के नाम पर हो
- शहीद स्मारक बनाया जाए
-परिवार के एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दी जाए।
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मां- शशिकला देवी
पिता-सुरेश कुमार पाल
जन्म- 12 अगस्त 1997
सेना में भर्ती- 15 जून 2015
भाई- सूर्य प्रताप
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Published on:
07 Apr 2020 11:42 am
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