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बबाई के किले में रखी तोप से बरसते थे गोले

बबाई ठिकाना के वंशज देवीसिंह शेखावत ने बताया कि बबाई का किला लगभग 550 वर्ष पुराना है। इसका निर्माण 1525 विक्रम संवत में शुरू हुआ था। लगभग साढे आठ वर्ष में पूर्ण हुआ। इस किले की खासियत यह है कि अन्य किलों की तरह यह पहाड़ी पर नहीं समतल जमीन पर बना हुआ है। इसमें त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था है।

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बबाई के किले में रखी तोप से बरसते थे गोले

बबाई के किले में रखी तोप से बरसते थे गोले

#babai village
खेतड़ी ञ्चपत्रिका. राजस्थान के झुंझुनूं जिले के बबाई गांव की स्थापना वर्ष 1493 में हुई। इसके किले में रखी तोप कभी गोले बरसाती थी। इसका सबूत आज भी किले में मौजूद है। बबाई ठिकाना के वंशज देवीसिंह शेखावत ने बताया कि बबाई का किला लगभग 550 वर्ष पुराना है। इसका निर्माण 1525 विक्रम संवत में शुरू हुआ था। लगभग साढे आठ वर्ष में पूर्ण हुआ। इस किले की खासियत यह है कि अन्य किलों की तरह यह पहाड़ी पर नहीं समतल जमीन पर बना हुआ है। इसमें त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था है। इसमें सबसे पहले 6 फीट मोटी दीवार है। उसके बाद धूलकोट (मिट्टी) की दीवार है। उसके बाद गहरी खाई है। जिसमे पानी भरा रहता था। बीछण तोप की नाळ आज भी किले में रखी हुई है।

#babai village
बबाई गांव की स्थापना के संबंध में अलग-अलग इतिहासकारों के अलग-अलग मत हैं। कुछ का मानना है कि इसे बाघा सिराधना व गोधा सिराधना ने बसाया। जबकि अनेक का कहना है बबाई गांव को निर्वाण राजपूत राजा बाल सिंह ने बसाया था। इनके अलावा भी अनेक मत हैं। ग्रामीण रामशरण शर्मा व मालचंद मिश्र ने बताया कि गांव में बबाई के अलावा सरदारपुरा व अशोक नगर राजस्व ग्राम हैं। इनकी कुल जनसंख्या 16 हजार पांच सौ व मतदाता आठ हजार पांच सौ हैं। गांव में ब्राह्मण, वैश्य, राजपूत, सैनी, कुमावत, मुस्लिम, जांगिड़, नायक, मेघवाल सहित अनेक जातियों के लोग मिलजुलकर रहते है। गांव में लगभग एक सौ सेवानिवृत अध्यापक व 50 के लगभग सेवारत अध्यापक हैं। लगभग 100 युवा सेना व पुलिस में तथा इतने ही सेवानिवृत फौजी हैं। बबाई में 20 के लगभग युवा एमबीबीएस की पढाई कर रहे हैं। अनेक ने डिग्री पूर्ण कर ली है। ग्रामीण गोविन्दराम हरितवाल व भोलाराम सैनी ने बताया कि गांव के मदनलाल गुप्ता सेवानिवृत आईएएस अधिकारी हैं। अशोक गुप्ता वर्तमान में डीआईजी पुलिस पद पर तैनात हैं। अरविन्द मिश्रा आरएएस पद से सेवानिवृत हैं। अर्जुनलाल बोछवाल, पूनम बोछवाल, जितेन्द्र सुरोलिया, विजेन्द्र सुरोलिया व दीपक कुमार राजकीय विद्यालयों में प्रधानाचार्य हैं। अरविन्द कुमार मिश्रा वित्त विभाग में आयुक्त, दीनबंधु सुरोलिया विकास अधिकारी, उमाकांत सुरोलिया सीडीपीओ व अरुणा शर्मा झुंझुनूं में जिला श्रम कल्याण अधिकारी पद पर कार्यरत हैं।

#babai village in jhunjhunu
ऐतिहासिक है बावड़ी

पंचायत समिति सदस्य नोरंगलाल सैनी व सरपंच मैना देवी ने बताया कि बबाई में पूरघोड़ा जोहड़ मन्दिर, बावड़ी बालाजी धाम मन्दिर, सीताराम जी का मन्दिर, देवजी मन्दिर, नृसिंह मन्दिर, सेडबालाजी मन्दिर, भूरभवानी मन्दिर सहित 15 से अधिक मन्दिर हैं।
बबाई की ऐतिहासिक बावड़ी बबाई की स्थापना से पूर्व बनी थी। तीन मंजिला 110 सीढियों की यह बावड़ी वहां लगे शिलालेख के अनुसार विक्रम संवत 1093 में एक बंजारा परिवार ने बनवाई थी। देख-रेख के अभाव में यह बावड़ी एकदम खण्डहर हो गई है।

मावण्डा के युद्ध में पिता-पुत्र ने दी शहादत

ग्रामीण रामावतार लाटा व देवीसिंह शेखावत ने बताया कि बबाई के राजा दलेल सिंह का मावण्डा के पुरानावास में भरतपुर राजा के साथ युद्ध हुआ। विक्रम संवत 1624 में हुए इस युद्ध में पिता दलेल सिंह व पुत्र कुंवर लक्ष्मण सिंह वीरगति को प्राप्त हुए थे। इन दोनों की छतरियां अभी भी बनी हुई है। इन पर इसका उल्लेख है। इन दोनों छतरियों में भित्ति चित्र भी बने हुए हैं। महेन्द्र मेघवाल व मनोज हरितवाल ने बताया कि खेतड़ी के बबाई गांव के बसने से पूर्व भी आकावाली की खदानों में तांबे का खनन व शोधन होता था। जिसके प्रमाण आज भी मुस्लिम मौहल्ले में पड़े जले हुए पत्थर हंै।


गांव की प्रमुख समस्या
- बावड़ी बालाजी धाम के पास पानी की निकासी नहीं है।
-गांव में दानदाता ने राजकीय बालिका माध्यमिक विद्यालय के लिए भवन बना कर दिया था। परन्तु बालिका सैकण्डरी स्कूल को बंद कर दिया गया है उसे पुन: शुरू किया जाए।
-पेयजल की पाइप लाइन जर्जर हो चुकी है।
-आम रास्तों पर अतिक्रमण है।