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वफादारों की सेवा में जुटी झुंझुनूूं की सुमन व प्रिया

भड़ौंदा खुर्द निवासी सुमन चौधरी पिछले पांच साल से आवारा श्वानों का नि:शुल्क उपचार कर रही है। बीए बीएड सुमन ने इसके लिए प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण भी ले रखा है। उसने बताया सर्दियों में रात को एक पिल्ले को तड़पता देखा। उसे घर ले आई। उसे दवा दिलाई। उसके बाद उसे जहां भी श्वान बीमार दिखाई देते हैं वह अपने खर्चे पर उपचार करती है।

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वफादारों की सेवा में जुटी झुंझुनूूं की सुमन व प्रिया

वफादारों की सेवा में जुटी झुंझुनूूं की सुमन व प्रिया

Suman Choudhary And Priya Mahariya Jhunjhunu


राजेश शर्मा

श्वान एक ऐसा जीव है, जो जिस घर में रहता है, वहां के लोगों के प्रति अपनी वफादारी पूरी निभाता है। हर वर्ष 26 अगस्त को विश्व डॉग डे मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य वफादार व चार पैर वाले दोस्तों की दुर्दशा की ओर ध्यान आकर्षित करना और उन्हें गोद लेने के लिए प्रोत्साहित करना है। आज विश्व डॉग डे पर हम बता रहे हैं राजस्थान के झुंझुनूं जिले के तीन ऐसे व्यक्तियों के बारे में जो वफादार जानवर की खिदमत में जुटे रहते हैं। तीनों ही खुद की जेब से पैसे खर्च कर आवारा श्वानों का इलाज करते हैं। सर्दी हो, गर्मी या बरसात। हर मौसम में तीनों श्वानों के लिए दवा के साथ भोजन की व्यवस्था के लिए हर वक्त तैयार रहते हैं।

सुमन चौधरी: रोज खिलाती है खाना, नि:शुल्क करती है उपचार
भड़ौंदा खुर्द निवासी सुमन चौधरी पिछले पांच साल से आवारा श्वानों का नि:शुल्क उपचार कर रही है। बीए बीएड सुमन ने इसके लिए प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण भी ले रखा है। उसने बताया सर्दियों में रात को एक पिल्ले को तड़पता देखा। उसे घर ले आई। उसे दवा दिलाई। उसके बाद उसे जहां भी श्वान बीमार दिखाई देते हैं वह अपने खर्चे पर उपचार करती है। गंभीर श्वानों का अस्पताल में उपचार करवाती है। इसके अलावा हर दिन श्वानों को खाना खिलाती है और दूध पिलाती है। इस कार्य में उसके मंडासी निवासी ससुराल वाले भी सहयोग करते हैं।

प्रिया महरिया:

झुंझुनूं जिले के खेतड़ीनगर स्थित केसीसी टाउनशिप में रहने वाली प्रिया महरिया पिछले सात साल से बीमार श्वानों का प्राथमिक उपचार नि:शुल्क कर रही है। गंभीर होने की स्थिति में खुद के खर्चे पर दूसरे चिकित्सकों से उपचार करवाती है। कोई भी व्यक्ति यदि किसी श्वानों को मारता हुआ दिखाई देता है तो उससे टोकने से भी नहीं चूकती। अब तो प्रिया को देखकर अनेक व्यक्ति पशुओं को मारने की बजाय उनसे स्नेह करने लगे हैं। उन्होंने आस-पास आवारा घूमने वाले श्वानों के नाम भी रख दिए हैं। इसलिए कस्बेवासियों व आस-पास के बच्चे भी उन्हें डॉग वाली दीदी कहकर पुकारते हैं।

डॉ. अनिल खींचड़: इलाज करने चले जाते हैं 20 किमी दूर तक
नवलगढ़ के निवाई गांव निवासी पेशे से पशु चिकित्सक डॉ. अनिल खींचड़ को कोई भी व्यक्ति फोन कर देता है तो वह अपना वाहन लेकर श्वान का इलाज करने बीस किलोमीटर दूर तक चले जाते हैं। आवारा श्वान का इलाज वह नि:शुल्क करते हैं। बीकानेर से बैचलर ऑफ वेटरनरी की डिग्री ले चुके खींचड़ ने बताया कि वह अभी न्यू हाउङ्क्षसग बोर्ड झुंझुनूं में रहते हैं और वर्ष 2014 से श्वानों का नि:शुल्क इलाज कर रहे हैं। उनके साथ पूरी टीम यह कार्य कर रही है। कई श्वानों के वह निशुल्क कृत्रिम पैर भी लगा चुके। कुत्तों के प्रति लोगों को जागरूक भी कर रहे हैं। जानवरों की सेवा करने पर जिला कलक्टर उनको जिला स्तर पर सम्मानित भी कर चुके।

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