
हरियाणा की अनिता चिड़ावा में बनी टीचर दीदी
चिड़ावा (झुंझुनूं).राजस्थान के झुंझुनूं जिले के चिड़ावा कस्बे में हरियाणा की बेटी अनिता झुग्गी झौपडियों के बच्चों का भविष्य संवार रही है। सूरजगढ़ बाइपास रोड की झुग्गी बस्ती के बच्चों को वह शिक्षा से जोड़ रही है। इसके लिए उसने निशुल्क पाठशाला शुरू की है। अब वह बच्चों की टीचर दीदी बन गई है। बच्चे अब उसे इसी नाम से पुकारने लगे हैं।
इस पाठशाला का संचालन गांव तोलासेही हाल रिद्धि-सिद्धि कॉलोनी निवासी अनिता पूनिया पत्नी विकास पूनियां कर रही है। अनिता का पीहर हरियाणा के हंसवाल कला गांव में है। जबकि ससुराल तोलासेही में है। वह खुद स्नातक तक पढ़ी हुई है।
अनिता ने पति विकास पूनियां के साथ मिलकर झुग्गी बस्ती के जरूरतमंद बच्चों को शिक्षित करने का निर्णय लिया। जिसके लिए पूनियां ने अपने निवास स्थान पर ही सरला पाठशाला के नाम से स्कूल का संचालन शुरू किया। पाठशाला में फिलहाल 28 बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाया जा रहा है।
#teacher didi anita chirawa
अनिता पूनियां ने बताया कि चिड़ावा की बाइपास पर झुग्गी बस्ती के बच्चों को कचरा बीनते और भिक्षा मांगते देखकर मन विचलित हुआ। जिसके लिए अपने घर पर ही पाठशाला शुरू कर दी। प्रारंभ में बच्चों को जोडऩा मुश्किल हुआ। हालांकि बाद में झुग्गी बस्ती के लोग ने आगे आने लगे। अनिता ने बताया कि वे बच्चों की नि:शुल्क आवासीय विद्यालय खुलने पर विचार कर रही हैं।
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पिछले साल शुरू की पाठशाला-
पिछले वर्ष शुरू की गई सरला पाठशाला में शुरू में दो बच्चों ने ही प्रवेश लिया। पाठशाला में बच्चों को जोडऩे के लिए झुग्गी बस्ती के लोगों को समझाया। जिसका असर भी दिखा। लॉकडाउन से पहले पाठशाला में 19 बच्चों ने प्रवेश ले लिया। फिलहाल 28 बच्चे प्रतिदिन अध्ययन करने आते हैं। जो कि सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करते हुए पढ़ाई करते हैं।
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अब लोग यहां मनाने लगे जन्मदिन
सरला पाठशाला में लोग भी सहयोग देने लगे हैं। अनिता ने बताया कि जन्मदिन, शादी सालगिरह और पुण्यतिथि पर लोग पाठशाला पहुंचते हैं। जो कि बच्चों के लिए खाना, पाठ्य सामग्री, कपड़े और जरूरी सामग्री प्रदान करते हैं। समय-समय पर लोग आर्थिक सहयोग भी देते रहते हैं।
आवासीय पाठशाला का सपना-
संचालक ने बताया कि गैर आवासीय के बाद आवासीय पाठशाला खोलने पर भी विचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि घर से कुछ ही दूरी पर झुग्गी बस्ती के निकट पुस्तैनी प्लॉट पड़ा है। जिसमें निर्माण कार्य करवाकर आवासीय पाठशाला खोलने का लक्ष्य है।
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पढ़ाई के साथ भोजन भी-
सरला पाठशाला में आने वाले बच्चों को पढ़ाई के साथ समय-समय पर भोजन और नाश्ता भी दिया जाता है। उन्होंने बताया कि ऐसा करने से बच्चों की संख्या में इजाफा हुआ है। पाठशाला में तीन से दस साल तक के बच्चे अध्ययनरत हैं। जिसे सुबह दस से दोपहर एक बजे तक नियमित अध्यापन करवाया जाता है। पाठशाला में बच्चों को पाठ्य सामग्री भी निशुल्क दी जाती है।
रिपोर्ट-सुरेन्द्र डैला
Published on:
15 Feb 2021 09:56 pm
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