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गोभी हो तो उदयपुरवाटी जैसी

झुंझुनूं जिले की इस गोभी की मांग दिल्ली, गुरुग्राम, हिसार, नारनौल व जयपुर में भी खूब हो रही है।

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गोभी हो तो उदयपुरवाटी जैसी

गोभी हो तो उदयपुरवाटी जैसी


पचलंगी(झुंझुनूं). फूल गोभी की फसल अब उदयपुरवाटी के पहाड़ी क्षेत्र के गांवों में मुख्य फसल का रूप लेती जा रही है। कभी जौ, गेंहू व बाजरे की फसल पर आश्रित किसान अब फूल गोभी की खेती से मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। उदयपुरवाटी उपखण्ड मुख्यालय व आस - पास के गांवों के साथ अब उपखण्ड के जहाज, राजीवपुरा, मणकसास व खेतड़ी, नवलगढ़ उपखण्ड के गांवों में भी बड़े पैमाने पर गोभी की खेती हो रही है। जिले की इस गोभी की मांग दिल्ली, गुरुग्राम, हिसार, नारनौल व जयपुर में भी खूब हो रही है।
फूल गोभी की खेती से जुड़े किसान केदार मल, सीताराम, लाल चन्द सैनी, सोना देवी, सविता देवी, सुमन देवी ने बताया कि दो हजार से तीन हजार में एक क्यारी बीज के रूप मेंं गोभी की पौध आती है। एक क्यारी की पौध से एक बीघा में पौध रोपण किया जाता है। 60 दिन में फसल तैयार हो जाती है। किसान गौरू राम, फूल चन्द ने बताया कि एक बीघा में आठ हजार तक का खर्च आता है। जिससे किसान एक बीघा में लगभग बीस सें तीस क्विंटल गोभी तैयार करता है। जिसकी मंडियों में गोभी की फसल शुरू होने पर 30 से 40 रुपए प्रतिकिलो के हिसाब से व बाद में 20 से 10 रुपए प्रति किलो की आय होती है।

खेतड़ी की पौध की मांग -
फूल गोभी की पौध झुंझुनूं जिले के खेतड़ी कस्बे व खेतड़ी के करमाड़ी की प्रसिद्ध थी । इसकी मांग अधिक थी। मुक्ति लाल सैनी का कहना है कि समय के साथ अब झुंझुनूं के उदयपुरवाटी सीकर के नीमकाथाना के रायपुर,हेमपुरा सहित गांवों व कस्बों में किसान पौध तैयार कर फूल गोभी की खेती करते हैं।


समर्थन मूल्य व उन्नत बीज की मांग-
किसानों की मांग है कि फूल गोभी सहित सब्जियों का सरकार द्वारा मंडियों में समर्थन मूल्य मिले व किसानों को सब्सिडी पर उन्नत किस्म का बीज की सुविधा मिले।

इनका कहना है-
जिले में फूल गोभी का रकबा प्रति वर्ष बढ़ रहा है। जहां 5-7 वर्ष पहले गांव में दो चार क्यारी सब्जी बोई जाती थी । अब बीघा के हिसाब से बुआई होती है। कृषि की नई तकनीक आने पर किसानों का रूझान अब फसलों की बजाए सब्जियों की और बढ़ा है। इनमें लागत कम मुनाफा अधिक होता है।
-डॉ. विजय पाल कस्बा, सहायक निदेशक कृषि विस्तार झ्ंाुझुनंू