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दानदाता के सहयोग से अस्पताल में मुर्दों को नसीब हो रहा कफन

राजकीय भगवानदास खेतान अस्पताल में दम तोड़ने वाले मरीजों के शव को कफन तक नसीब नहीं हो रहा था। खुले में शव देख शहर के गोपीचंद गाडिया ने तय किया कि उनकी तरफ से शवों को ढंकने के लिए अस्पताल को कफन का कपड़ा मुहैया करवाया जाएगा। वर्ष 2016 से गाड़िया की ओर से अस्पताल को सफेद कपड़ा दान किया जा रहा है।
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दानदाता के सहयोग से अस्पताल में मुर्दों को नसीब हो रहा कफन

दानदाता के सहयोग से अस्पताल में मुर्दों को नसीब हो रहा कफन

The dead are getting shrouds with the help of donors : जिले के सबसे बड़े राजकीय भगवानदास खेतान अस्पताल में दम तोड़ने वाले मरीजों के शव को कफन तक नसीब नहीं हो रहा था। खुले में शव देख अन्य मरीज व उनके परिजन विचलित हो जाते थे। मृतक के परिजन को बाहर से कफन का कपड़ा खरीद कर लाना पड़ता था। ऐसे में आगे आए शहर के गोपीचंद गाडिया। गाडिया ने तय किया कि उनकी तरफ से शवों को ढंकने के लिए अस्पताल को कफन का कपड़ा मुहैया करवाया जाएगा। वर्ष 2016 से गाड़िया की ओर से अस्पताल को सफेद कपड़ा दान किया जा रहा है। अस्पताल में रोजाना करीब 3000 मरीज आते हैं। इनमें कई गंभीर हालत में पहुंचते हैं। हर महीने औसतन 90 से 120 लोगों की मौत हो जाती है। कइयों की अस्पताल पहुंचने के दौरान रास्ते में मौत हो जाती है। ऐसे में शव को ढकने के लिए सफेद कपड़े (कफन) की जरूरत होती है।

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अस्पताल में करवा चुके लाखों के काम
दानदाता गाडिया की ओर से अस्पताल में अन्य कार्य में भी लाखों रुपए खर्च किए गए हैं। उन्होंने 50 लाख रुपए की लागत से इमरजेंसी विंग को तैयार कराया, अस्पताल परिसर में 30 लाख रुपए से मंदिर का जीर्णोद्वार भी कराया। कोरोना की पहली लहर में भर्ती मरीजों और ड्यूटी पर रहने वाले कर्मचारियों के लिए रोजाना भोजन की व्यवस्था की। इसके अलावा करीब सात लाख रुपए की लागत से वार्ड नंबर एक से पांच तक 72 बैड को ऑक्सीजन पाइप लाइन से जुड़वाने में सहयोग किया।

मानवता के लिए कर रहे यह कार्य
मानवीय दृष्टिकोण को देखते हुए यह छोटा सा कार्य कर रहे हैं। किसी न किसी रूप में मानवता के लिए इंसान को सेवा कार्य करना चाहिए।

गोपीचंद गाडिया, दानदाता

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