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शूटिंग में भारत ने ओल​म्पिक में सबसे ज्यादा पदक जीते, उसकी राजस्थान में सरकारी एकेडमी क्यों नहीं?

भारत ने ओल​म्पिक में सबसे ज्यादा पदक शूटिंग में जीते हैं, लेकिन राजस्थान में शूटिंग की सरकारी एकेडमी ही नहीं है।

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निशानेबाजी की तैयारी करते ​खिलाड़ी।

राजेश शर्मा.

पेरिस ओलम्पिक 2024 में भारत के ​खिलाडि़यों ने कुल छह पदक जीते। इनमें सबसे ज्यादा तीन पदक अकेले शूटिंग खेल में जीते हैं। लेकिन यह विडम्बना है कि क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत के सबसे बड़े राज्य राजस्थान में क्रीडा परिषद की कुल 22 एकेडमियों में से एक भी सरकारी शूटिंग एकेडमी नहीं है। इस कारण मजबूरी में खिलाडि़यों को निजी एकेडमियों में हर माह पांच से दस हजार रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। सरकारी एकेडमी में खिलाडि़यों की पढाई, ट्रेनिंग, नाश्ता खाना-पीना, रहना, ड्रेस, साबुन, जूते व सभी खेल उपकरण निशुल्क उपलब्ध करवाए जाते हैं।

शिक्षा विभाग के कैलेंडर में भी पिस्टल नहीं

शिक्षा विभाग ने छह अगस्त को सत्रह व उन्नीस वर्ष आयु वर्ग का खेल कैलेंडर जारी किया है। इसमें एथलेटिक्स के अलावा 32 खेलों को शामिल किया है। इसके तीसरे समूह में पांच नम्बर खेल पर राइफल शूटिंग तो है लेकिन पिस्टल शूटिंग नहीं है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि स्कूलों में मनु भाकर, सरबजोत व स्वपनिलकुसाले जैसे खिलाडी कैसे तैयार होंगे।

ओलम्पिक में राजस्थान

आठ करोड़ से ज्यादा की आबादी वाले राजस्थान से ओलम्पिक में मात्र दो खिलाड़ी पेरिस में खेलने गए हैं। जबकि राजस्थान से छोटे राज्यों से ज्यादा खिलाड़ी ओलम्पिक में पहुंचे हैं और पदक भी जीत जीतकर लाए हैं। सबसे ज्यादा पदक राजस्थान से छोटे राज्य हरियाणा ने जीते हैं, राजस्थान के ​खिलाड़ी खाली हाथ आए हैं।

पेरिस: शूटिंग में पदक

मनु भाकर, कांस्य

मनुभाकर व सरबजोत सिंह, कांस्य

स्वपनिल कुसाले, कांस्य

पेरिस में भारत के कुुल पदक 6

एथलेटिक्स

नीरज चोपड़ा: भाला फेंक में रजत पदक

हॉकी: भारत को कांस्य पदक

कुश्ती: अमन सेहरावत: कांस्य

शूटिंग

मनु भाकर: कांस्य पदक

मनु भाकर व मनुभाकर व सरबजोतसिंह: कांस्य पदक

स्वपनिलकुसाले: कांस्य पदक

अब आस, क्योंकि खेल मंत्री खुद शूटर

अब तो राजस्थान के खेल मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ खुद ओलम्पियन हैं। उनका खेल भी शूटिंग का रहा है। इनसे पूर्व के खेल मंत्री अशोक चांदना भी खिलाड़ी रहे हैं। अब उम्मीद है कि राजस्थान में भी शूटिंग की सरकारी एकेडमियां खुलेंगी।

खाली पदों का सच

राजस्थान क्रीड़ा परिषद में कुल 483 पद मंजूर हैं, लेकिन वर्तमान में 323 पद खाली पड़े हैं। अनेक स्टेडियमों में ठेकेदार के कोच ट्रेनिंग दे रहे हैं। कोच व जिला खेल अधिकारी के पद खाली होने से खिलाडि़यों को सही ट्रेनिंग नहीं मिल रही। कोच के नए पदों का सृजन भी नहीं हो रहा।

इनका कहना है

राजस्थान में शूटिंग की सरकारी खेल एकेडमी बनने से खेलों का बेहतर माहौल बनेगा। खिलाडि़यों का खर्चा भी बचेगा।

-सुशील, नेशनल खिलाड़ी शूटिंग