
पिलानी खुर्द और कुलहरियों की ढाणी (फोटो: पत्रिका)
Unique Villages Of Rajasthan: झुंझुनूं की मंडावा पंचायत समिति क्षेत्र के राजस्व गांव कुलहरियों की ढाणी और पिलानी खुर्द के बीच वर्षों पुराना भाईचारा आज भी लोगों के लिए मिसाल बना हुआ है। दोनों गांवों के लोग एक-दूसरे को भाई मानते हैं। इतना ही नहीं इस आपसी सम्मान और सद्भावना की वजह से आज तक इन दोनों गांवों के बीच कभी शादी का रिश्ता तक नहीं हुआ।
कुलहरियों की ढाणी के राजेश कुलहरि और पिलानी खुर्द के सुरेश कुमार शर्मा और राजू सिंह शेखावत बताते हैं कि यह परंपरा कई दशकों से चली आ रही है। दोनों गांवों के लोग उम्र और रिश्ते के अनुसार एक-दूसरे को दादा-दादी, ताऊ-ताई, काका-काकी, भाई-बहन जैसे पारिवारिक संबोधनों से बुलाते हैं। इससे आपसी प्रेम और सम्मान का भाव पीढ़ी-दर-पीढ़ी और मजबूत हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जैसे हिंदू समाज में एक ही गोत्र में विवाह वर्जित माना जाता है वैसे ही ढाणी और पिलानी खुर्द के लोग भी एक-दूसरे को एक ही गोत्र के समान मानते हैं। यह अनोखी सामाजिक परंपरा गांवों में सद्भाव और आत्मीयता की प्रतीक बन चुकी है।
कुलहरियों की ढाणी में जाट (कुलहरिया, रूहिल, चबरवाल), ब्राह्मण, मेघवाल और जांगिड़ समुदाय के लोग रहते हैं। वहीं पिलानी खुर्द में ब्राह्मण, जाट (ढाका, सिहाग, पिलानिया, धायल), राजपूत, मेघवाल, नायकान और नाई जातियों के लोग हैं। विविध जातियों के बावजूद दोनों गांवों में आपसी एकता, सहयोग और सौहार्द का वातावरण हमेशा बना रहता है।
गांवों की एकता का अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि ग्राम सेवा सहकारी समिति का नाम भी ‘ढाणी-पिलानी’ रखा गया है। इसका कार्यालय कुलहरियों की ढाणी की राजस्व सीमा में स्थित है लेकिन समिति का संचालन पिलानी खुर्द पंचायत के अंतर्गत होता है।
ग्रामीणों के अनुसार, करीब चार दशक पहले तक कुलहरियों की ढाणी और पिलानी खुर्द एक ही राजस्व गांव थे। बाद में ढाणी को अलग राजस्व गांव का दर्जा मिल गया लेकिन पुराने रिश्ते आज भी कायम हैं। यही वजह है कि ढाणी-पिलानी आज भी एक गांव जैसे ही जुड़े हुए हैं। इसलिए एक ही गांव के मानते हुए लोग एक-दूसरे के यहां रिश्ता नहीं करते।
Published on:
12 Nov 2025 12:33 pm
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