16 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अनूठी गोशाला : जहां नंदी खाते हैं देसी घी के लड्डू

सर्दी के सीजन में नंदियों को तीन महीने दिसंबर, जनवरी और फरवरी में लगातार लड्डू खिलाए जाते हैं। ये तीन महीने कड़ाके की सर्दी के रहते हैं।

less than 1 minute read
Google source verification
अनूठी गोशाला : जहां नंदी खाते हैं देसी घी के लड्डू

अनूठी गोशाला : जहां नंदी खाते हैं देसी घी के लड्डू

Unique Gaushala: Where Nandi eats desi ghee laddus : प्रदेश में नवाचारों के लिए प्रसिद्ध गोपाल गोशाला में रह रहे नंदियों को सर्दी की सीजन में देसी घी के लड्डू खिलाए जाते हैं। गोशाला में नंदियों को देसी घी के लड्डू खिलाने का कार्य पिछले आठ साल से किया जा रहा है। जैसे ही कड़ाके की सर्दी शुरू होती है, गोशाला में देसी घी के लड्डू बनाने का कार्य शुरू कर दिया जाता है।

तीन महीने खिलाते हैं

सर्दी के सीजन में नंदियों को तीन महीने दिसंबर, जनवरी और फरवरी में लगातार लड्डू खिलाए जाते हैं। ये तीन महीने कड़ाके की सर्दी के रहते हैं।
प्रबंधन खुद करता है व्यवस्था

शुरू से लेकर अब तक गोशाला प्रबंधन की ओर से लड्डू बनाने के लिए देसी घी, बाजरे का आटा, काली मिर्च, गोंद आदि की व्यवस्था करता है। कुछ दानदाता भी अपनी तरफ से नंदियों को लड्डू खिलाने के लिए सहयोग कर देते हैं।

इनका कहना है...

गोशाला में नंदियों को आठ साल से देसी घी के लड्डू खिलाए जा रहे हैं। हर सर्दी के सीजन में जितने भी गोशाला में नंदी होते हैं, सभी को लड्डू खिलाते हैं। घी समेत अन्य सामग्री की व्यवस्था गोशाला प्रबंधन करता है। कई बार दानदाता भी सहयोग कर देते हैँ। लड्डू खिलाने का मकसद नंदियों की इम्यूनिटी को बढ़ाना है।

प्रमोद खंडेलिया, अध्यक्ष गोपाल गोशाला, झुंझुनूं