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अनूठा मंदिर, आधा राजस्थान और आधा हरियाणा में, जहां नहीं चढ़ाई जाती नकदी

महंत नंदकिशोरदास व राजेन्द्र सिंह शेखावत ने बताया कि बसई दुग्धभागा नदी के किनारे बसा हुआ है। इसे ऋषियों की तपो भूमि के नाम से जाना जाता है। किवदन्ती है कि दुग्धभागा नदी जब अपने पूर्ण वेग से आती थी तो नदी किनारे स्थित बड़े मन्दिर के मुख्यद्वार के पास आते ही वहां के संत नृसिंहदास दुग्धभागा की आरती करते थे तथा नारियल व चूंदड़ी चढाते थे। नदी मुख्यद्वार को छू कर मन्दिर की थली के ऊपर नहीं चढती थी।

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अनूठा मंदिर, आधा राजस्थान और आधा हरियाणा में, जहां नहीं चढ़ाई जाती नकदी

अनूठा मंदिर, आधा राजस्थान और आधा हरियाणा में, जहां नहीं चढ़ाई जाती नकदी


खेतड़ी ञ्चपत्रिका. राजस्थान के बसई गांव में स्थित रामेश्वरदास धाम मन्दिर देश में एक ऐसा मन्दिर है। जहां नकद राशि नहीं चढ़ाई जाती तथा एक ही मन्दिर में सभी देवी देवताओं की प्रतिमाएं हैं। अजय पाण्डे व सुरेन्द्र सिंह शेखावत ने बताया कि मन्दिर की स्थापना रामेश्वरदास ने की थी। मंदिर का अग्रभाग राजस्थान के बसई में तथा पिछला भाग हरियाणा के ब्राह्मणवास में आता है। मन्दिर में प्रतिवर्ष रामनवमी को मेला लगता है। यहा सम्पूर्ण वर्ष श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। बसई की स्थापना लगभग चार सौ वर्ष पूर्व हुई थी। गांव के फतेहचन्द शर्मा, कैप्टन रामजीवन सिंह शेखावत, श्योलाल सिंह शेखावत व रामसिंह शेखावत ने बताया कि बटेरी(बानसूर) से दो भाई सांगासिंह व सिलेदी सिंह आए थे। उनमे से सांगा सिंह ने बसई गांव को बसाया था तथा सिलेदी सिंह ने नंगलीसिलेदी सिंह बसाया था। बसई प्रदेश का एक मात्र ऐसा गांव था जहा पांच ठिकानों के थाने लगते थे। उनके भवन आज भी मौजूद है। गोविन्दराम गुप्ता व हनुमान प्रसाद भार्गव ने बताया कि इनमें खेतड़ी, जयपुर, मण्डावा, परसरामपुरा व महनसर ठिकाना प्रमुख थे। इस कारण बसई को उस समय पंचपाना के नाम से सम्बोधित किया जाता था। इसमें रिहायसी मकानों के गांव में जिन लोगों के पास पुराने पट्टे हैं। उनके आज भी अलग-अलग ठिकानो के पट्टे है।
सरपंच टिंकू कंवर व रविसिंह शेखावत ने बताया कि गांव में राजपूत, ब्राह्मण,जाट, सोनी, जांगिड़, मेघवाल, मीणा, अहीर, खटीक, कुम्हार सहित सभी जातियों के लोग रहते है। गांव की जनसंख्या 6 हजार पांच सौ चालीस व मतदाता संख्या 4 हजार छह सौ उनसठ है।
महंत नंदकिशोरदास व राजेन्द्र सिंह शेखावत ने बताया कि बसई दुग्धभागा नदी के किनारे बसा हुआ है। इसे ऋषियों की तपो भूमि के नाम से जाना जाता है। किवदन्ती है कि दुग्धभागा नदी जब अपने पूर्ण वेग से आती थी तो नदी किनारे स्थित बड़े मन्दिर के मुख्यद्वार के पास आते ही वहां के संत नृसिंहदास दुग्धभागा की आरती करते थे तथा नारियल व चूंदड़ी चढाते थे। नदी मुख्यद्वार को छू कर मन्दिर की थली के ऊपर नहीं चढती थी।


परदेस गए, पर माटी को नहीं भूले

बसई के दर्जनों प्रवासी व्यवसाय के लिए दिल्ली, मुम्बई, रायपुर, कोलकाता, हैदराबाद सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में व्यवसाय के लिए गए। परन्तु मातृ भूमि को नहीं भूले। गांव के एडवोकेट राजेश गुप्ता व रामकरण गुप्ता ने बताया कि गांव में समस्त संस्थाओं के भवन दानदाताओं द्वारा बनाए गए है। इनमे राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय प्रभुदयाल द्वारा, राजकीय अस्पताल, राजकीय पशु अस्पताल, खेल मैदान, राजकीय बालिका सैकण्डरी स्कूल व राजकीय प्राथमिक स्कूल का भवन सीताराम रामनिवास गोयल द्वारा बनाए गए तथा राजकीय औषधालय भवन पटवारी परिवार द्वारा बनवाया गया है।
हरीशरण गुप्ता व आनंद प्रकाश सुन्दरका ने बताया कि गांव में श्याम मन्दिर, रामेश्वरदास मन्दिर, बड़ा मन्दिर, गायत्री मन्दिर, पानीवाला हनुमान मन्दिर, विश्वकर्मा मन्दिर, शनिदेव मन्दिर, रघुनाथ मन्दिर, बिहारीजी का मन्दिर, गंगा मन्दिर, गोपीनाथ मन्दिर, दुर्गा मन्दिर सहित लगभग एक दर्जन मन्दिर हैं।


गांव का विनीत मीणा देहरादून में कलक्टर

रामानंद छावल व वेदपालसिंह शेखावत ने बताया कि बसई के बेटों ने उच्च पदों पर पहुंच कर बसई का नाम रोशन किया है। इनमे विनित कुमार मीणा देहरादून में जिला कलक्टर, राकेश कुमार कुमावत व राधेश्याम मीणा अतिरिक्त जिला कलक्टर, नीरज भाम्बू व कृष्णा मीणा न्यायिक अधिकारी, संगीता मीणा वृतनिरीक्षक, राकेश कुमार मीणा, उपनिरीक्षक डा.रतनलाल गोयल(लंदन), डा.संजय गोयल, डा.शक्ति जांगिड़, डा.संतोष मीणा व डा.संगीता मीणा चिकित्सक, घनश्याम गोयल उपनिदेशक आईटी विभाग, रोनिक मीणा आईईएस तथा आनंद प्रकाश मीणा जलदाय विभाग में अधीक्षण अभियंता के पद पर कार्यरत है। इनके अतिरिक्त लगभग एक सौ जवान सेना व पुलिस में है तथा 80 अध्यापक व 100 के लगभग अन्य राजकीय सेवाओं में कार्यरत है।


बृजमोहन अग्रवाल विधायक

ग्रामीण सांवरसिंह मीणा व बालगोविन्द सोनी ने बताया कि बसई निवासी बृजमोहन अग्रवाल वर्तमान में छत्तीसगढ में रायपुर से भाजपा के विधायक हैं। तीन बार मंत्री रह चुके हैं। सत्यनारायण पाण्डे व गंगाराम कुमावत ने बताया कि गांव में गत 60 वर्षो से श्रीकृष्ण गोशाला गांव के जनसहयोग से संचालित है। इसमे सैकड़ों गाय है।

गांव की प्रमुख समस्या:-

-कुम्भाराम जलयोजना की मुख्य टंकी बसई में बना दी। परन्तु सप्लाई ईलाखर, टीबा व जमालपुर में किया जाता है गांव में 5-6 दिन में एक बार पानी आता है।
-अवैध बजरी खनन जारी।
-चिकित्सालय में प्रयाप्त स्टाफ नहीं है।
-पशु अस्पताल में चिकित्सक नहीं है।
-राष्ट्रीयकृत बैंक व एटीएम नहीं है।
-पुलिस चौकी भी नहीं