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World famous silent Ramleela : विजयादशमी को नहीं यहां पर चतुर्दशी को जलता है रावण

सभी पात्र बिना थके लगातार पांच घंटे तक खुले मैदान में नृत्य की मुद्रा में युद्ध करते रहे। इस दौरान जय श्रीराम के नारों से पुरा पांडाल गूंजता रहा। रामलीला का गुरुवार को राम राज्याभिषेक के साथ समापन होगा।

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World famous silent Ramleela

देशभर में विजयादशमी के दिन ही रावण का दहन होता है। लेकिन झुंझुनूं जिले का बिसाऊ कस्बा ऐसा है, जहां रावण विजयादशमी की बजाए चतुर्दशी को दहन होता है। बिसाऊ की विश्वप्रसिद्ध मूक रामलीला में बुधवार को चतुर्दशी को रावण वध की लीला देखने दर्शकों का हुजूम उमड़ा। रामलीला मैदान में जहां देखों, वहां लोग खड़े नजर आए। बिसाऊ के गढ़ की बुर्ज, बिहारीजी के मंदिर की सीढ़ियां और पुस्तकालय की छत से भी बड़ी संख्या में लोगों ने राम-रावण के बीच छिडे़ युद्ध को देखा। शाम साढ़े पांच बजे शुरू हुई रामलीला रात करीब 10: 20 मिनट तक चली। इसके बाद 35 फीट ऊंचा रावण का पुतला जलाया गया। इस दौरान लीला का मंचन कर रहे युवाओं का जोश देखते ही बन रहा था। सभी पात्र बिना थके लगातार पांच घंटे तक खुले मैदान में नृत्य की मुद्रा में युद्ध करते रहे। इस दौरान जय श्रीराम के नारों से पुरा पांडाल गूंजता रहा। रामलीला का गुरुवार को राम राज्याभिषेक के साथ समापन होगा। इस दौरान अयोध्या में बने राम मंदिर की थीम पर निकाली गई सजीव झांकी ने सबका मन मोह लिया। झांकी में कृष्णकांत नोवाल ने राम का अभिनय किया। इसमें बाल स्वरूप में हनुमान और भगवान कृष्ण को भी दिखाया गया। रामलीला को देखने के लिए शेखावाटी समेत मुबई, कोलकता, सुरत दिल्ली से कई प्रवासी बंधु भी पहुंचे।

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