
Yamuna Nahar Jhunjhunu झुंझुनूं की नहर का मामला संसद में गूंजा
Yamuna Nahar Jhunjhunu
झुंझुनूं.नहरी पानी को लेकर राजस्थान पत्रिका में लगातार समाचार प्रकाशित होने के बाद यह मामला अब संसद में गूंजने लगा है। चूरू से सांसद राहुल कस्वा ने संसद सत्र के दौरान नियम 377 के तहत लोकसभा में ताजेवाला हैड से यमुना का जल शेखावाटी अंचल को उपलब्ध करवाने का मुद्दा उठाया। सांसद ने कहा कि शेखावाटी की करीब एक लाख हैक्टेयर भूमि को ङ्क्षसचित करने के लिए व आमजन के पेयजल की सुविधा के लिए यमुना के जल को ताजेवाला हैड से भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से पानी उपलब्ध करवाने के लिए यमुना जल योजना पर कार्य शुरू किया गया था। इस कार्ययोजना के तहत केंद्रीय जल आयोग ने तत्कालीन राजस्थान सरकार को डी.पी.आर. बनाने के निर्देश दिए थे। तत्कालीन राजस्थान सरकार ने हेलिकॉप्टर से हवाई सर्वे करवाकर तुरंत प्रभाव से डी.पी.आर. केंद्रीय जल आयोग को स्वीकृति के लिए भिजवाई गई, लेकिन आज दिन तक डी.पी.आर. स्वीकृति की कोई भी कार्यवाही नहीं हुई है। यह योजना क्षेत्र के लिए अत्यंत ही महत्वपूर्ण है और शेखावाटी क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए वरदान साबित होगी।
जानें, क्या है यमुना जल समझौता
वर्ष 1994 में पांच राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने यमुना जल समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। उस समय राजस्थान में भैरोंङ्क्षसह शेखावत, हरियाणा में भजन लाल, उत्तरप्रदेश में मुलायम ङ्क्षसह यादव, हिमाचल प्रदेश में वीरभद्र ङ्क्षसह व दिल्ली में मदन लाल खुराना मुख्यमंत्री थे। समझौते के तहत राजस्थान के तीन जिलों झुंझुनूं, चूरू और भरतपुर को 1.19 बिलीयन क्यूबिक मीटर पानी मिलना है।
झुंझुनूं जिले व चूरू के राजगढ़ ब्लॉक को ताजेवाला हैड से 1917 क्यूसेक तथा भरतपुर को ओखला बैराज से बचा हुआ पानी मिलना तय हुआ। भरतपुर के जनप्रतिनिधियों ने तो पानी ले लिया, लेकिन झुंझुनूं का पानी वोटों की राजनीति में उलझ गया।
नहर के कार्य को गति नहीं मिलने पर यमुना जल संघर्ष समिति के संयोजक यशवर्धन ङ्क्षसह शेखावत ने भी राजस्थान उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर रखी है। उस पर भी नियमित सुनवाई हो रही है।
Published on:
18 Dec 2022 08:47 pm
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