
यमुना जल समझौते के मामले में राजस्थान हाइकोर्ट ने केंद्रीय जल आयोग को छह हफ्ते का समय देकर मांगी प्रगति रिपोर्ट
झुंझुनूं. राजस्थान हाईकोर्ट में यमुना जल समझौते मामले में मंगलवार को सुनवाई की। जिसमें 24 साल से लम्बित इस मामले पर नवम्बर 2017 में यशवर्धन सिंह शेखावत की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पानी की गम्भीर स्थिति होने पर चिंता जताई गई। हाइकोर्ट ने केंद्रीय जल आयोग से इस मुद्दे पर अब तक हुई प्रगति की रिपोर्ट मांगी है। साथ ही यूवाइआरबी (अपर यमुना रीवर बोर्ड) को भी इस मामले जवाबदेह मानते हुए नोटिस जारी किए गए हैं। क्योंकि हरियाणा सरकार के असहयोग के चलते पिछले 24 साल से राजस्थान का झुंझुनूं और चूरू जिला पानी के अपने वाजिब हक से वंचित है। 21 नवम्बर 2017 को यशवर्धन सिंह शेखावत की ओर से इस समझौते को लागू करवाने के लिए जनहित याचिका दायर की गई । इस मुद्दे पर पिछले डेढ़ वर्ष से हुई लगातार सुनवाई एवं कोर्ट की ओर से सख्ती से बार बार प्रगति रिपोर्ट मांगे जाने के कारण सरकार की ओर से 20 हजार 000 करोड़ की डीपीआर बनवाकर केंद्रीय जल आयोग को भिजवाकर कोर्ट के समक्ष रिपोर्ट रखनी पड़ी। इसी कड़ी में आज हुई सुनवाई में कोर्ट की ओर से केंद्रीय जल आयोग को डीपीआर की मंजूरी एवं कार्य शुरू करने बाबत प्रगति की रिपोर्ट छह हफ्ते में पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। गौरतलब है कि यमुना जल समझौते पर १९९४ में पांच राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने हस्ताक्षर किए थे। जिसमें राजस्थान से भैरोसिंह शेखावत, हरियाणा से भजनलाल, उत्तरप्रदेश के मुलायमसिंह यादव, हिमाचल प्रदेश से वीरभद्रसिंह और दिल्ली से मदनलाल खुराना शमिल थे। इस समझौते के तहत राजस्थान के तीन जिलों झुंझुनूं, चूरू और भरतपूर को १.१९ बीसीएम पानी मिलना है।
दिव्यांग पूनम की पेंशन शुरू
मानसिक व शारीरिक रूप से दिव्यांग 24 वर्षीया पूनम की पेंशन कलक्टर रवि जैन के निर्देशानुसार मंगलवार को फिर से शुरू कर दी गई। जैन के पास इस्लामपुर निवासी शंकरलाल अपनी दिव्यांग बेटी पूनम को गोदी में लेकर पंहुचे थे व उन्हें बताया कि पूनम की पेंशन गत 8 माह से बंद है। इस पर कलक्टर ने पटवारी को बुलाकर जरूरी दस्तावेज तैयार करवाए और आठ माह बाद फिर से पेंशन शुरू कर दी। पूनम को 8 माह की बकाया पेंशन एक मुश्त बुधवार को जमा हो जाएगी।
Published on:
09 Jul 2019 11:02 pm
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