
झुंझुनूं में आई पुंगनूर नस्ल की गायें।
आंध्र प्रदेश के चित्तूर ज़िले के पुंगनूर क्षेत्र की गायों को राजस्थान के शेखावाटी अंचल की आबोहवा पसंद आने लगी है। कम हाइट के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध इस नस्ल की कुछ गायों को झुंझुनूं लाया गया है। गोवंश को यहां का घास, दूब, पानी, बांट खूब पसंद आ रहा है। इन गायों की औसत कीमत चार लाख से नौ लाख रुपए तक है। यह हर दिन औसत दो से तीन किलो तक दूध दे देती हैं।
इनका दूध औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है। दूध मिलना मुश्किल होता है। कई जगह इनके दूध की कीमत एक हजार रुपए प्रति लीटर तक है। इनके दूध में 8 प्रतिशत तक फैट होता है, जबकि सामान्य गायों के दूध में यह 3 से 5 प्रतिशत ही होता है। इनके मूत्र में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। कई जगह फसलों को रोग मुक्त करने के लिए इन गायों का यूरिन किसान अपनी फ़सलों पर छिड़क रहे हैं।
गाय लाने का मकसद यह संदेश देना भी है कि लोग घरों में ज्यादा से ज्यादा इनको पालें। इनको जगह की कम जरूरत होती है। गोशाला को यह गायें प्रवासी उद्योगपति रमाकांत टीबड़ा ने दान की है। मंदिर कमेटी के श्याम सुंदर टीबड़ा ने बताया कि यह गायें चारा व बांट भी नाम मात्र का खाती हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नई दिल्ली के सरकारी आवास पर भी पुंगनूर नस्ल की गायें हैं। मकर संक्रांति पर मोदी ने गायों के साथ ट्वीट भी किया था। पुंगनूर क्षेत्र की रहने के कारण ही इन गायों का नाम पुंगनूर रखा गया है। इन गायों की संख्या देशभर में बहुत कम बची है। सफ़ेद, हल्के भूरे व काले रंग की गायों का माथा चौड़ा होता है और सींग छोटे और अर्धचंद्राकार होते हैं। इनकी सेवा में जुटे वीरेन्द्र व मंगल चंद ने बताया कि इनका स्वभाव सौम्य और मिलनसार है। छोटे बच्चों की तरह खेलती भी रहती है।
पहले चरण में चार गायों व एक सांड को यहां लाया गया है। दूसरे चरण में इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी। खेमी शक्ति मंदिर के पार्क की खुली जगह में इन गायों को रखा गया है। गोपाल गोशाला झुंझुनूं के मंत्री नेमीचंद अग्रवाल ने बताया कि गोशाला में इनके लिए अलग से एनक्लोजर बनवाया जा रहा है, ताकि वहां उनको पुंगनूर क्षेत्र जैसी आबोहवा मिल सके। दूसरी बड़े गायों से भी इनको अलग रखा जाएगा।
Published on:
26 Sept 2024 12:45 pm
बड़ी खबरें
View Allझुंझुनू
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
