खाद्य एक मानव स्वास्थ्य के समुचित रखरखाव के लिए बेहद ज़रूरी है। शुद्ध, पौष्टिक, किसी भी प्रकार की मिलावट से मुक्त भोजन प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। खाद्य अपमिश्रण निवारण निदेशालय मिलावट/ गलत ट्रेड-मार्क की जाँच के लिए जिम्मेदार है। आईपीसी की धारा 272 और 273 के अस्तित्व ही में, यद्यपि खाद्य पदार्थों की मिलावट के नियंत्रण के लिए पर्याप्त नहीं मानते थे। इस खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम को 1954 में इस प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए और खाने की वस्तुओं में मिलावट रोकने के लिए, अधिनियमित किया गया था। केन्द्र सरकार नियम बनाती है जो कि 1955 के "खाद्य अपमिश्रण निवारण नियम, के रूप में जाना जाता है।अब यह अधिनियम खाद्य सुरक्षा व मानक अधिनियम 2006 से जाना जाता है । जिसे दिल्ली सरकार का खाद्य संरक्षा एवं मानक विभाग लागू करता है । इस अधिनियम के अंतर्गत खाद्य पदार्थो के नमूना लेने की प्रकि्या शुरू की गयी है।