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IIT सामूहिक रूप से शिक्षकों की करेगा भर्ती: जावड़ेकर

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) को शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए सामूहिक रूप से विदेशों में रहने वाले भारतीय शिक्षकों से बातचीत करने को कहा गया है।

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Amanpreet Kaur

Jul 20, 2018

prakash javdekar

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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) को शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए सामूहिक रूप से विदेशों में रहने वाले भारतीय शिक्षकों से बातचीत करने को कहा गया है। सरकार ने गुरुवार को यह जानकारी संसद को दी। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने एक सवाल के जवाब में राज्यसभा में कहा कि उनके मंत्रालय की ओर से आईआईटी को दुनियाभर से उत्तम शिक्षकों की तलाश करने के लिए बातचीत करने को कहा गया है। राज्यसभा में एक सदस्य ने पूछा कि शिक्षकों की कमी दूर करने को लेकर सरकार क्या कर रही है।

उन्होंने कहा कि हमारे विद्यार्थी दुनिया में उत्तम हैं और असली समस्या शिक्षकों की है। इसलिए हमने फैसला लिया है कि सभी आईआईटी और केंद्रीय संस्थान मिलकर दुनियाभर से अच्छे शिक्षकों की तलाश करें और इसके लिए विज्ञापन दें। साथ ही इच्छुक लोगों को शिक्षण पेशा में आने के लिए आमंत्रित किया जाए। उन्होंने कहा कि अगले महीने आईआईटी परिषद की बैठक होगी। सभी आईआईटी संयुक्त रूप से सामूहिक प्रयास से अच्छे एनआरआई और ओसीआई शिक्षकों की तलाश करके उनकी सेवा लेंगे। हम उनको परामर्श सेवा प्रदान करने की स्वतंत्रता प्रदान करेंगे।

जावड़ेकर कांग्रेस सदस्य जयराम रमेश की ओर से पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे। रमेश ने बताया कि आईआईटी दिल्ली में 40 फीसदी शिक्षकों की कमी है जबकि आईआईटी बंबई में 38 फीसदी शिक्षकों की कमी है।

शिक्षकों की भर्ती में आरक्षण को लेकर सरकार प्रतिबद्ध

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने शुक्रवार को कहा कि मोदी सरकार विश्वविद्यालयों में शिक्षकों (फैकल्टी) की नियुक्ति में आरक्षण को लेकर प्रतिबद्ध है और सरकार अदालत द्वारा 50 फीसदी आरक्षण को रद्द करने के आदेश से सहमत नहीं है। जावडेकर ने कहा कि पिछले साल इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को 13-बिंदुओं की एक सूची जारी करने पर बाध्य होना पड़ा लेकिन हम अदालत के फैसले से सहमत नहीं हैं।

जावडेकर ने शून्यकाल के दौरान इस मसले को कुछ सदस्यों द्वारा उठाए जाने पर राज्यसभा को बताया कि हमने इस पर दो विशेष अनुज्ञा याचिकाएं (एसएलपी) दायर की हैं, जिनपर 13 अगस्त को सुनवाई होनी है। उन्होंने कहा कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने विश्वविद्यालयों और कालेजों में शैक्षणिक पदों के लिए होने वाली भर्ती के लिए साक्षात्कार पर पहले ही रोक लगा दी है। ये भर्तियां रोस्टर के तहत होने वाली थीं मगर एसएलपी पर फैसला आने तक इसे लंबित रखा गया।

उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण को बचाने में हम सक्षम होंगे। हम इसे न तो खत्म होने देंगे और न ही किसी दूसरे को इसे समाप्त करने देंगे। मुद्दा समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव ने उठाया। उन्होंने पांच मार्च के यूजीसी रोस्टर का उल्लेख किया कहा कि एक साजिश के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग को वंचित रखने के लिए प्रत्येक 13 शैक्षणिक पदों में से नौ पद को अनारक्षित कर दिया गया है और इनमें अन्य पिछड़ा वर्ग को तीन पद और अनुसूचित जाति को एक पद प्रदान किया गया है।

यादव का समर्थन वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद और पी. एल. पुनिया और कई अन्य नेताओं ने भी किया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पिछले साल अप्रैल में यूजीसी द्वारा शैक्षणिक पदों पर भर्ती के लिए संस्थान के आधार पर आरक्षण का निर्धारण करने के सर्कलुर को खारिज कर दिया था। सर्वोच्च न्यायाल ने भी उच्च न्यायालय के आदेश को यथावत रखा और यूजीसी को विभाग के आधार पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षित पदों के लिए सर्कुलर जारी करने को कहा।