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राजस्थान तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती 2017 में कोर्ट का नया आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए सरकार को नियुक्ति प्रक्रिया जारी रखने के लिए कहा है
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Anil Kumar

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Updated: 3 Jul 2018, 10:44 AM IST

RPSC 3rd Grade Teachers Recruitment

RPSC तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती 2017 में कोर्ट का नया आदेश

राजस्थान तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती 2017 के लेवल दो में नियुक्ति का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों के लिए खुशखबरी है। सुप्रीम कोर्ट ने तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती-2017 के लेवल मामले में राज्य सरकार और उम्मीदवारों को राहत देते हुए भर्ती और नियुक्ति प्रक्रिया जारी रखने के आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ के 30 अप्रैल 2018 के उस आदेश पर रोक लगा दी गई है जिसमें तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती-2017 (लेवल दो) में उन अभ्यर्थियों को ही पात्र माना था जिन्होंने ग्रेजुएशन के साथ बीएड व रीट भी उन विषयों के साथ पास किया हो जिस विषय के शिक्षक पद के लिए उन्होंने अप्लाई किया था।


हाईकोर्ट ने इसलिए लगाई थी रोक
यह आदेश न्यायाधीश मदन बी.लोकुर व दीपक गुप्ता की खंडपीठ ने यह आदेश राज्य सरकार की एसएलपी पर दिया है। सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई थी की हाईकोर्ट के आदेश के कारण शिक्षकों के हजारों पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया अधर में लटक गई है। इस वजह से हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई जाए ताकि शिक्षकों के पदों पर नियुक्तियां दी जा सके। हाईकोर्ट ने मनीष मोहन बोहरा की अपील पर दिए आदेश में राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह शिक्षक पद पर नियुक्ति देते समय उन अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं दे जिनके पास रीट, स्नातक व बीएड में संबंधित विषय नहीं रहा है। हाईकोर्ट ने कहा था कि बीएड शिक्षक बनने की अनिवार्य पात्रता है और बीएड में संबंधित विषय वही हो सकता है जो स्नातक में पढ़ा गया हो। बीएड में वह विषय नहीं पढ़ा गया है तो शिक्षक उस विषय का विशेषज्ञ नहीं बन सकता। साथ ही रीट में भी वही विषय होना चाहिए।


4800 पदों पर नियुक्ति का मामला
राज्य सरकार की ओर से अंग्रेजी विषय के 4800 पदों के लिए शिक्षकों की 2017 में भर्ती निकाली गई थी। राज्य सरकार ने इनमें से 3500 पदों पर नियुक्तियां दे दी। इससे पहले राज्य सरकार ने 2016 की तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती में रीट में वह विषय मांगा था जिसके लिए उन्होंने आवेदन किया था। लेकिन स्नातक व बीएड में उसे अनिवार्य नहीं माना था। यह मामला हाईकोर्ट पहुंचने पर अदालत ने स्नातक व बीएड में भी वह विषय होना माना। लेकिन इस दौरान राज्य सरकार ने 29 अगस्त 2017 को स्नातक व रीट में संंबंधित विषय मान लिया लेकिन बीएड में वह संबंधित विषय नहीं रखा। इस पर प्रार्थी की ओर से हाईकोर्ट में कहा गया कि स्नातक व रीट में अंग्रेजी विषय है लेकिन बीएड में नहीं है। जबकि लेवल दो में विषय का विशेषज्ञ होना जरूरी है आैर शिक्षक पद के लिए बीएड अनिवार्य है और उसमें संबंधित विषय को नहीं मान रहे। इस पर अदालत ने कहा कि बीएड शिक्षक बनने की अनिवार्य पात्रता है और बीएड में वही विषय हो सकता है जो स्नातक में पढ़ा गया हो।