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TIFR Recruitment -परियोजना वैज्ञानिक अधिकारी के 3 रिक्त पदों पर भर्ती

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) ने परियोजना वैज्ञानिक अधिकारी के 3 रिक्त पदों पर भर्ती

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Yuvraj Singh Jadon

Dec 30, 2017

tifr

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) ने परियोजना वैज्ञानिक अधिकारी के 3 रिक्त पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इच्छुक व योग्य उम्मीदवार 21 जनवरी 2018 तक या उससे पहले निर्धारित प्रारूप के माध्यम से पद के लिए आवेदन कर सकते हैं।

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) में रिक्त पदों का विवरणः
परियोजना वैज्ञानिक अधिकारी: 03 पद

पात्रता मानदंड:
शैक्षिक योग्यता:किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से कम से कम 60% अंकों के साथ कंप्यूटर साइंस / सूचना प्रौद्योगिकी में बीए/ बीटेक।

आयु सीमा:28 से 31 वर्ष
आवेदन कैसे करें:
योग्य उम्मीदवार निर्धारित प्रारूप के माध्यम से 23 दिसंबर 2017 तक या उससे पहले पद के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन पत्र आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्रमुख, प्रतिष्ठान, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, होमी भाभा रोड, नौसेना नगर, कुलाबा, मुंबई 400 005 के पते पर भेज सकते हैं।

महत्वपूर्ण तारीख:
आवेदन की अंतिम तिथि: 21 जनवरी 2018

TIFR Recruitment Notification 2017:

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) में परियोजना वैज्ञानिक अधिकारी के 3 रिक्त पदों पर भर्ती के लिए विस्तृत अधिसूचना यहां क्लिक करें।

परिचयः

आजादी-पूर्व भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियां उसकी औद्योगिक सफलता की तुलना में बहुत आगे थी। यह उस समय के किसी भी देश के लिए विशिष्ट बात थी, लेकिन भारत के वैज्ञानिक तेवर को सुधारने और नव-स्वतंत्र देश की वैज्ञानिक अवसंरचना को सशक्त करने की जरूरत थी। इन्हीं उद्देश्यों से अनुप्राणित होकर होमी जे भाभा और जेआरडी टाटा ने 1945 में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (टीआईएफआर) की स्थापना की दिशा में प्रयास किए।

श्री भाभा ने अपने एक पत्र में सर दोरबाजी टाटा ट्रस्ट से टीआईएफआर की संकल्पना को मूर्त रूप देने के लिए वित्तीय सहायता हेतु अनुरोध किया। इस पत्र में उन्होंने “फीजिक्स (भौतिकी) के अध्ययन के लिए दुनिया में किसी भी देश की तुलना में बेहतरीन संस्थान (स्कूल) की स्थापना” के बारे में चर्चा की। दूसरी ओर, जेआरडी ने संस्थान के विषय पर चर्चा करने के साथ ही “तरक्की या विकास” पर भी बल दिया। इन द्रष्टाओं ने देश के इतिहास के नाजुक समय में मिलकर काम करते हुए विज्ञान को आधुनिक भारत की पहचान का एक अभिन्न तत्त्व माना।