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हाल ए जोधपुर सहकार भवन: अपनों के लिए रजिस्टर और गैरों के लिए बायोमेट्रिक मशीन…!

सहकार भवन में 10 में से केवल एक दफ्तर के लिए लगाई गई बायोमेट्रिक मशीन  

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Jodhpur sahkar bhawan

Jodhpur sahkar bhawan

जोधपुर उपभोक्ता होलसेल भण्डार के कर्मचारियों की हाजिरी के लिए प्रशासक ने बायोमेट्रिक मशीन लगवा दी है, जबकि सहकार भवन के अन्य नौ दफ्तरों के कार्मिक रजिस्टर में ही हाजिरी दे रहे हैं। इस सौतलेपन को लेकर भण्डार कार्मिकों में रोष है। कार्मिकों ने भण्डार महाप्रबंधक को बायोमेट्रिक शुरू करने पर विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।

रेलवे स्टेशन स्थित राजीव गांधी सहकार भवन में सहकारिता विभाग से जुड़े दस दफ्तर संचालित हैं। करीब एक महीने पहले राज्य सरकार ने सहकारी समितियों के अतिरिक्त रजिस्ट्रार (अपील) प्रदीप जैन को भण्डार का प्रशासक नियुक्त किया था। प्रशासक लगते ही जैन ने भण्डार के खाते से 13 हजार रुपए में बायोमेट्रिक मशीन खरीदकर दूसरी मंजिल पर स्थित भण्डार कार्यालय के बाहर लगा दी, जबकि स्वयं जैन ने अपने कार्यालय के लिए कोई मशीन नहीं खरीद रखी है। उनके दफ्तर के कार्मिक रजिस्टर में हस्ताक्षर करते हैं। भण्डार कार्मिकों ने इसका विरोध किया। साथ ही कार्मिकों ने यह सुझाव भी दिया कि अब बायोमेट्रिक मशीन आ गई है तो उसे मुख्य दरवाजे के बाहर लगा दिया जाए, जिससे सहकार भवन के अन्य दफ्तरों के कार्मिकों की भी हाजिरी हो सके। कर्मचारियों की मंाग अब तक मानी नहीं गई है।

इन दफ्तरों के कार्मिक की रजिस्टर में हाजिरी

सहकारी भण्डार और अतिरिक्त रजिस्ट्रार-अपील दफ्तर के अलावा सहकार भवन में आठ अन्य दफ्तर विशेष लेखा परीक्षक कार्यालय, क्षेत्रीय अंकेक्षण अधिकारी कार्यालय, उप रजिस्ट्रार (सहकारी समितियां) कार्यालय, अतिरिक्त रजिस्ट्रार (सहकारी समितियां) कार्यालय, राजफैड, केंद्रीय सहकारी बैंक की शाखा, केंद्रीय भूमि विकास बैंक की शाखा और दी जोधपुर कॉपरेटिव बैंक की शाखा भी संचालित हो रही हैं। इन सभी के कार्मिक रजिस्टर में हस्ताक्षर करते हैं। जैन सहकार भवन की प्रबंध समिति के उपाध्यक्ष भी हैं और भवन की देखरेख का जिम्मा उन्हीं पर हैं।

चपरासी के साथ बैठने को मजबूर अफसर


सहकार भवन में संचालित सहकारी समितियां विशेष लेखा परीक्षक कार्यालय के विशेष लेखाधिकारी ओमप्रकाश लोहिया के कक्ष की छत की सीलिंग छह महीने पहले भरभरा कर गिर गई। सीलिंग गिरने के बाद छत कमजोर हो गई है। डर के मारे लोहिया ने अपना कक्ष बंद कर दिया। वे पिछले एक साल से चपरासी और बाबूओं के साथ बैठने को मजबूर है। ऐसा नहीं है कि लोहिया ने इसकी शिकायत नहीं की, लेकिन भवन प्रबंध समिति के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही।

इनका कहना है

मैंने कई बार भवन प्रबंध समिति को इसकी शिकायत कर दी, लेकिन समिति मेरे कक्ष को ठीक ही नहीं करवा रही। मैं पिछले साल भर से अपने जूनियर कर्मचारियों के बीच बैठने को विवश हूं। - ओमप्रकाश लोहिया, विशेष लेखा परीक्षक, सहकारी समितियां