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मंडोर किले में निकले 12वीं सदी के ब्रह्मा मंदिर को जीर्णोद्धार का इंतजार

12 लाख का बजट स्वीकृत करने के बाद भी एएसआई ने नहीं ली सुध, बिखरे पत्थर जमींदोज होने के कगार पर

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मंडोर किले में निकले 12वीं सदी के ब्रह्मा मंदिर को जीर्णोद्धार का इंतजार

मंडोर किले में निकले 12वीं सदी के ब्रह्मा मंदिर को जीर्णोद्धार का इंतजार

जोधपुर/मंडोर . सृष्टि की रचना करने वाले भगवान ब्रह्मा को खुद अपने ही मंदिर के जीर्णोद्धार का इंतजार है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अफ सरों ने करीब दो दशक पूर्व मंडोर में 10वीं-12वीं सदी का प्राचीन ब्रह्मा व शिव मंदिर ढूंढ निकाला था। विभाग ने मंदिर री-स्टोर करने के लिए 12 लाख रुपए का बजट भी जारी किया, लेकिन मंदिर 20 साल से जीर्ण-शीर्ण हालत में पड़ा है। मंदिर को रि-स्टोर करने और संरक्षित करने के लिए टेंडर प्रक्रिया भी शुरू की गई, लेकिन अधिकारियों के तबादले के कारण मामला ठंडे बस्ते में पड़ा है। दरअसल, मंडोर उद्यान के ऊपर प्राचीन दुर्ग के अवशेष हैं। यहां एक गर्भगृह सहित शिव और ब्रह्मा के मंदिर भी हैं। इसके पत्थर कई जगह से गायब भी हैं। मुश्किल से गर्भगृह का कुछ हिस्सा बचा हुआ है। नियमित देखरेख के अभाव में मंदिर दिनोंदिन क्षतिग्रस्त हो रहा है। मंदिर का एक हिस्सा भी नहीं मिल पाया है। ---

कैसे करेंगे संरक्षित?

विभाग के जानकारों ने बताया कि यह मंडोर किले में खुदाई के दौरान निकला मंदिर 10वीं से 12वीं सदी का हो सकता है। सदियों पुराने मंदिर में सार-संभाल नहीं होने से अधिकतर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है, लेकिन मंदिर का मूल स्वरूप आज भी बरकरार है। मंदिर की दीवार पूरी हट चुकी है और आसपास के कई प्राचीन और कलाकृति वाले पत्थर गायब हैं तो कुछ फिर से जमींदोज होने के कगार पर हैं। पुरातत्व विभाग ने इसे विशेष लेप से संरक्षित के लिए घोषणाएं की थीं, लेकिन दो दशक से किसी भी अधिकारी ने इसकी सुध नहीं ली है।

झाडिय़ों में आग से कलात्मक पत्थरों को खतरा
मंडोर किला परिसर में लगी झाडिय़ों में आग के कारण कलात्मक पत्थर भी क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। मंडोर किले में कोई स्टाफ तैनात नहीं होने के कारण समूचा परिसर शाम होते ही शराबियों और जुआरियों का अड्डा बन जाता है। क्षेत्रवासी कई बार इसकी शिकायत मंडोर पुलिस थाने में कर चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।


जल्द शुरू होगा जीर्णोद्धार

मंदिर बहुत पुराना है। पहले भी इसके जीर्णोद्धार के प्रयास होते रहे हैं। इस बार हमने पूरा प्रोजेक्ट बना कर काम शुरू करने का निर्णय लिया है। इस बार हमें चार करोड़ का बजट मिला है, लेकिन यह पूरे राजस्थान के लिए है। क्षेत्र में आग लगाने के मामले की जांच की जाएगी। शीघ्र ही एक योजना बना कर मंडोर दुर्ग पहाड़ी पर बने मंदिरों के जीर्णोद्धार का काम किया जाएगा।
विठल बडिग़ेर, अधीक्षण पुरातत्वविद, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, जोधपुर सर्किल

पहले भी कोशिश हुई, पर काम नहीं हुआ

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से 2004 और 2006 में आंशिक रूप से मंदिर के लिए बजट भी स्वीकृत हुआ, पर काम पूरा नहीं हो सका। अप्रेल, 2014 में विभाग की प्रदेश इकाई के दो सर्किल जयपुर और जोधपुर बना दिए गए।


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