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कश्मीरी नेताओं के नाम मुखौटा कम्पनियां…! जांच में जुटा कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय भी चौंका

देश में अब तक 2.18 लाख कम्पनियां डी एक्टिवेट  

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जोधपुर

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Chen Raj

Oct 06, 2017

2 lac shell companies got deactivated in India

2 lac shell companies got deactivated in India

देश में मुखौटा कम्पनियों की लिस्ट लम्बी होती जा रही है। इनमें देश के बड़े राजनेता, आईसीएआईए, आईसीएसआई और अन्य संस्थाओं के कुछ सदस्यों के नाम भी सामने आ रहे हैं। जिन राजनेताओं के नाम मुखौटा कम्पनियों में सामने आ रहे हैं, उनमें से कुछ कश्मीर के बड़े राजनेता भी शामिल हैं। इससे केन्द्रीय कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय भी हैरान है। मंत्रालय की मानें तो देश में अब तक 2.18 लाख मुखौटा कम्पनियां सामने आ चुकी हैं। इन कम्पनियों को डी एक्टिवेट कर दिया गया है। अब यह कामकाज नहीं कर पाएगी। इनके बैंक खाते भी फ्रिज कर दिए गए हैं। यह खुलासा खुद कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री पीपी चौधरी ने किया है। उन्होंने शेल कंपनियों के खिलाफ और कदम उठाने के भी संकेत दिए हैं।

नोटबंदी के बाद शेल कम्पनियों की आड़ में की गई मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। मंत्रालय को संदेह है कि ब्लैकमनी की लॉन्ड्रिंग के लिए शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया गया है। इसमें विदेशों से भी लेन-देन हुआ है। इसकी जांच की गई, तो अब तक 2.18 लाख मुखौटा कम्पनियां सामने आई हैं। जो गत माह करीब दो लाख थी। इन कम्पनियों की संख्या बढऩे से मंत्रालय भी हैरान है। मंत्रालय ने डिफॉल्ट करने वाली कंपनियों से जुड़े चार्टर्ड एकाउंटेंट, कंपनी सैक्रेटरी और कॉस्ट एकाउंटेंट जैसे प्रोफेशनल्स की भी पहचान की है।

कागजों में बड़ी कम्पनी, मौके पर गए तो मिला टूटा घर


मुखौटा कम्पनियों की जांच कर रही विभिन्न एजेंसियां जब इन कम्पनियों के पत्ते पर पहुंची तो चौंक गई। कम्पनियों के करोड़ों के लेन-देन कागजों में थे, लेकिन उनके पते पर पहुंची आयकर व अन्य एजेंसियों की टीम को टूटे-फूटे घर मिले। इसके बाद ऐसी कम्पनियों के खिलाफ जांच तेज कर दी गई है।

शेयर बाजार की खरीद-बिक्री पर रोक

इधर, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने स्टॉक एक्सचेंजों को मुखौटा कंपनियों में शेयरों की खरीद-बिक्री बंद करने का निर्देश दिए हैं। ऐसी 331 कंपनियां हैं, जिन्हें कंपनी मामलों के मंत्रालय ने मुखौटा करार दिया था। इन कम्पनियों में से कुछ ऐसी कम्पनियां भी सामने आ रही हैं, जिनका कामकाज सही बताया जा रहा है, इसकी पड़ताल की जा रही है।

कालेधन पर गठित विशेष जांच दल

मुखौटा कंपनियों की पहचान के लिए सुझाए उपायों के बाद सरकार ने ऐसे फर्जी लेन-देन पर रोक लगाने का निर्णय किया है। 2.18 लाख मुखौटा कम्पनियों में करोड़ों रुपए का लेन-देन होना सामने आया है। गंभीर अपराध जांच कार्यालय मुखौटा कंपनियों और उनकी सहायक इकाइयों का व्यापक डिजिटल डेटाबेस भी तैयार कर रहा है।

हर पहलू से जांच
मुखौटा कम्पनियों के खिलाफ गंभीरता से जांच की जा रही है। यह संख्या बढ़ती जा रही है। अब तक 2.18 लाख मुखौटा कम्पनियां सामने आ चुकी हैं। इन्हें डी एक्टिवेट कर दिया गया है। कुछ बड़े राजनेताओं के नाम भी सामने आए हैं। इनमें से कुछ कश्मीर से जुड़े हुए हैं, उनसे जवाब मांगा गया है। केवल रिटर्न दाखिल नहीं करना ही जांच के दायरे में नहीं आ रहा है। कई पहलुओं से विभिन्न एजेंसियों से जांच करवा रहे हैं। निर्दोष निवेशकों को बचाना सरकार का फर्ज है। ऐसी कम्पनियों पर लगाम लगेगी तो निवेशकों का पैसा बचेगा। तेजी से जांच चल रही है। शीघ्र ही बड़े खुलासे होंगे। -पीपी चौधरी, केन्द्रीय राज्य मंत्री, कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय