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ज़ोधपुर जिले के तिलवासनी क्षेत्र में अज्ञात बीमारी से 36 हरिणों की मौत

  एक पखवाड़े से काले हरिणों की मौत का सिलसिला जारी, वनविभाग के अधिकारी मौके पर, जांच के लिए विसरा सैम्पल एकत्र कर परीक्षण के लिए फ़ोरेंसिक लैब और आइवीआरआई बरेली भेजे

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ज़ोधपुर जिले के तिलवासनी क्षेत्र में अज्ञात बीमारी से 36 हरिणों की मौत

ज़ोधपुर जिले के तिलवासनी क्षेत्र में अज्ञात बीमारी से 36 हरिणों की मौत

जोधपुर. जिले के बिलाड़ा रेंज के तिलवासनी गांव के खेतों के आसपास पिछले 15 दिनों में अज्ञात बीमारी के कारण करीब 36 चिंकारों व काले हरिणों की मौत हो चुकी है। मौत का यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को भी मृत हरिणों के शव मिले हैं। क्षेत्र के पर्यावरण प्रेमियों की सोशल मीडिया पर मुहिम के बाद वनविभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। जिले के सहायक वन संरक्षक राजबिहारी मित्तल ने बताया कि क्षेत्र में वन्यजीव चिकित्सक को मौके पर बुलाकर मृत चिंकारों व काले हरिणों के पोस्टमार्टम के बाद विसरा जांच के लिए एकत्र कर आइवीआरआई बरेली और फ़ोरेंसिक लैब भिजवा दिए है। उपवन संरक्षक वन्यजीव विजय बोराणा ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय वन्यजीव संस्थान के वेटरीनरी साईंटिस्ट डॉ. श्रवणसिंह राठौड़ को उपचार, परीक्षण व कारणों का पता लगाने के लिए घटना स्थल पर बुलाया है।

काले हरिणों में नाक व मुंह से टपकता है खून
तिलवासनी में मृत पाए गए कृष्ण मृग की नाक व मुंह से खून टपकता है। पोस्टमार्टम में पूरे श्वसन तंत्र में संक्रमण पाया गया है। पोस्टमार्टम के बाद प्रथम दृष्टया वन्यजीवों में हेमोरेजिक सेप्टिसिमिया अथवा हाइड्रोजन सायनाइड विषाक्तता हो सकती है। हाइड्रोजन सायनाइड काम्पाउंड खाद्यान्न जवार में पाया जाता है। खेतों में ज्वार की फसल खाने से मौत होना संभव है। जांच के लिए सैम्पल फ़ोरेंसिक लैब और आइवीआरआई बरेली भेजे गए हैं जहां से 5-7 दिन में रिपोर्ट आ सकती है।

डॉ. ज्ञानप्रकाश शाक्ष्य , चिकित्सक, माचिया जैविक उद्यान वन्यजीव चिकित्सालय

अब आगे क्या
अब क्षेत्र के वन्यजीव बहुल इलाकों में ऐंटीबायोटिक और मल्टीविटामिन-मल्टीमिनरल पाउडर हरे चारे में मिक्स करके वन्यजीवों को खुले चारागाह में रखवाने के प्रयास किए जा रहे है। वन्यजीव चिकित्सक काले हरिणों और चिंकारों को जवार के खेतों से दूर रखने का भी सुझाव दिया है। वन अधिकारियों के माध्यम से संयुक्त निदेशक पशुपालन से टीम भेजकर आस पास के सभी गावों में सभी पालतू मवेशियों में हेमोरेजिक सेप्टिसिमिया का टीकाकरण करवाने को कहा गया है। प्रभावित इलाकों में वनविभाग की टीम के साथ अभा बिश्नोई महासभा जीव रक्षा कमेटी के ओमप्रकाश लोल , रेंजर विजेन्द्रसिंह व इमरान खान , सुनील बाबल, रामदीन नैण आदि ने अवलोकन करते समय एक बीमार ब्लेक बक को लेकर चिकित्सक तक पहुंचाने का प्रयास किया लेकिन चिकित्सक तक पहुंचने से पहले ही ब्लेक बक ने दम तोड़ दिया।

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