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जोधपुर . जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय की अनुशंसा पर राज्य सरकार ने सामूहिक नकल प्रकरण में निलंबित नौ कॉलेजों को पांच दिन पहले वापस अनापत्ति प्रमाण पत्र दे दिया। सरकार से एनओसी मिलते ही विवि प्रशासन ने जल्दबाजी दिखाते हुए मंगलवार को एक के बाद एक कर के शाम तक नौ में से आठ कॉलेजों को वैकल्पिक मान्यता दे दी। गौरतलब है कि सिंडिकेट ने तीन महीने पहले इन कॉलेजों की मान्यता रद्द करते हुए पुलिस में प्राथमिकी दर्ज करवाने के निर्देश दिए थे, लेकिन विवि प्रशासन ने एफआईआर तो दर्ज नहीं करवाई। अलबत्ता बिना सिंडिकेट खुद ही कॉलेजों को अस्थाई हरी झंडी दे दी।
यह है मामला
विवि ने २१ जुलाई को नकल प्रकरण के मामले में नियम १२ (५) के तहत संभाग के नौ कॉलेज ग्लोबल एजुकेशन इंस्टीट्यूट सांचोर, लवकुश महाविद्यालय धोरीमन्ना बाड़मेर, सांवरिया महाविद्यालय धोरीमन्ना बाड़मेर, राजश्री महाविद्यालय सांचोर, कृष्णा महिला महाविद्यालय सांचोर, इंद्रा कॉलेज चितलवाना जालोर, श्री रणजीतसिंह शिक्षण संस्थान झाब जिला जालोर,सायला कॉलेज ,सायला जिला जालोर और बागोड़ा कॉलेज, बागोड़ा जिला जालौर की मान्यता निलंबित कर दी थी। विवि की रिपोर्ट पर कॉलेज आयुक्तालय ने भी इन कॉलेजों के अनापत्ति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिए।
एक अगस्त को विवि की सिंडिकेट बैठक में इस संबंध में विवि के कुलपति की ओर से की गई कार्रवाई को सिंडिकेट ने हरी झंडी दे दी। साथ ही नकल प्रकरण में शामिल इनविजिलेटर, परीक्षा केंद्र अधीक्षक और सम्बन्धित कॉलेज के प्राचार्य अथवा गवर्निंग काउंसिल के सचिव के विरुद्ध पुलिस में प्राथमिकी दर्ज करवाने के निर्देश दिए। विवि ने अब तक एफआईआर दर्ज नहीं करवाई। उधर कॉलेज आयुक्तालय ने विवि की ओर से किसी जांच समिति का हवाला देते हुए ७ दिसम्बर को सभी नौ कॉलेजों को फिर से एनओसी दे दी।
सिंडिकेट को रखा ताक परविवि की सिंडिकेट ने इन कॉलेजों की मान्यता रद्द की थी, लेकिन विवि प्रशासन ने मामला सिंडिकेट में रखने से पहले ही ९ में से ८ कॉलेजों को मंगलवार को वैकल्पिक मान्यता दे दी। एक कॉलेज को पीछे क्यों छोड़ा, इसका भी विवि के पास तार्किक जवाब नहीं है। उधर कॉलेजों की ओर से यह मामला हाईकोर्ट में ले जाने के बाद इस मामले में हाईकोर्ट का भी स्टे था।
मामला सिंडिकेट में रखेंगे
हमने इस मामले में विधिक राय मांगी है। कॉलेजों को केवल वैकल्पिक मान्यता दी है। पूर्ण मान्यता के लिए मामला सिंडिकेट में रखा जाएगा।
-प्रो. रामपालसिंह कुलपति, जेएनवीयू, जोधपुर
Published on:
13 Dec 2017 01:27 pm
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