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16 साल पहले किया था चिंकारा का शिकार, मुख्य गवाह पलटा, फिर भी आरोपी को मिली ऐसी सजा

अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पीपाड़सिटी ने वन्यजीव सुरक्षा अधिनियम के विचाराधीन प्रकरण में परिवादी के पक्षद्रोही होने के बावजूद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तीन वर्ष के कारावास की सजा के साथ आरोपी को अर्थदंड से दंडित करने का ऐतिहासिक निर्णय दिया है।

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पीपाड़सिटी। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पीपाड़सिटी ने वन्यजीव सुरक्षा अधिनियम के विचाराधीन प्रकरण में परिवादी के पक्षद्रोही होने के बावजूद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तीन वर्ष के कारावास की सजा के साथ आरोपी को अर्थदंड से दंडित करने का ऐतिहासिक निर्णय दिया है। अरटिया कला गांव में प्रार्थी सुखदेव बिश्नोई के खेत के पास जैतदान चारण का खेत है। यह खेत इस साल पृथ्वीराज पुत्र झूमरराम ने बंटाई पर ले रखा है।

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प्रार्थी दिनांक 17 अगस्त 2007 को रात्रि में अपने खेत की मवेशियों की चराई रोकने के लिए पहरेदारी पर था, तब रात 10 बजे के पूनाराम लौहार व पृथ्वीराज हरिजन निवासी अरटिया कलां ने मिलकर बंदूक से गोली मारकर एक चिंकारा का शिकार किया तथा मारे गए चिंकारे को जैतदान के खेत में ही पेड़ के पास में चिंकारे के दोनों मोटरसाईकिल पर डाल कर घर ले गए। इस मामले में प्रार्थी सुखदेव बिश्नोई निवासी अरटिया कलां की रिपोर्ट पर क्षेत्रीय वन अधिकारी ने मुकदमा अपराध अन्तर्गत धारा 2 (16) 9,39,50 वन्यजीव सुरक्षा अधिनियम में दर्ज कर बाद अनुसंधान दोनों आरोपियों के विरूद्ध न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया गया।

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पक्षद्रोही हुआ मुख्य गवाह
मामले में शिकायतकर्ता सुखदेव बिश्नोई ने न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन के तर्कों, तथ्यों का कोई समर्थन नहीं किए जाने पर पक्षद्रोही घोषित किया गया। प्रार्थी गवाह ने न्यायालय में कथन किया कि उसने क्षेत्रीय वन अधिकारी वन्यजीव उड़नदस्ता को कोई शिकायत पेश नहीं की। रिपोर्ट पर स्वयं के हस्ताक्षर होना स्वीकार करते बताया कि वह पढा लिखा नही हैं। इसके साथ मौका पंचनामा, फर्द गिरफ्तारी अभियुक्त फर्द जब्ती पर स्वयं के हस्ताक्षर होना स्वीकार किया, किंतु उसमें क्या लिखा पढी थी उसकी जानकारी से इनकार कर दिया। उसने न्यायालय में प्री चार्ज साक्ष्य में अपनी ओर से बयान दिए थे,जो सही दिए थे,लिखित रिपोर्ट देना और कार्रवाई देखने से इनकार कर दिया।

राज्य सरकार की दलील
अभियोजन पक्ष ने बहस के दौरान बताया कि गवाह श्रवणकुमार कि ओर से मुख्य परीक्षण में कथन किया कि वह परिवादी के साथ खेत में था, उसने गोली की आवाज सुनी थी। आरोपियों ने गोली चलाकर चिंकारा हिरण का शिकार किया था। क्षेत्रीय वन अधिकारी को फोन कर मौके पर बुलाया था। मौका पंचनामा बनाया था। टोपीदार बंदूक, खून लगा छुरा सहित बरामदगी की सारी कार्रवाई प्रार्थी सुखदेव, गवाह ओमाराम, कालराम, बाबूलाल चौधरी की उपस्थिति में होने की जानकारी दी।

न्यायालय का आदेश
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अलका जोशी ने सोलह वर्षो से विचाराधीन प्रकरण के निर्णय में परिवीक्षा का लाभ देने से इनकार करते हुए अभियुक्त पृथ्वीराज हरिजन निवासी अरटिया कला, भोपालगढ़ को दोषसिद्ध कर तीन वर्ष के साधारण कारावास के साथ दस हजार रुपए अर्थदण्ड से दंडित करने का आदेश दिया, जबकि आरोपी पुनाराम लोहार की मौत हो चुकी हैं। राज्य सरकार की ओर से लोक अभियोजन अधिकारी हीरालाल कुमावत ने पैरवी की।

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