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Maha Shivratri : जोधपुर के 490 साल पुराने अचलनाथ मंदिर का इतिहास जान आप में उमडऩे लगेगी आस्था

जोधपुर के कटला बाजार और कपड़ा बाजार के मध्य स्थित करीब 490 साल प्राचीन शिव मंदिर का इतिहास भी बहुत पुराना है।

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कंटेंट और वीडियो : नंदकिशोर सारस्वत/जोधपुर. शिवालयों की नगरी जोधपुर में करीब 2000 शिव मंदिर है लेकिन अचलनाथ मंदिर की प्रति लोगों की आस्था सर्वाधिक है। विक्रम सम्वत 1588 जेठ सुदी पंचमी तद अनुसार 21 मई 1531 को निर्मित यह मंदिर जोधपुर के महाराजा राव गांगा की रानी नानक देवी ने बनवाया था। जब मंदिर का निर्माण हो रहा था तब यहां पर प्राचीन शिवलिंग को अन्यत्र स्थानांतरित करने की कवायद की गई लेकिन शिवलिंग वहां से हट नहीं सका और अचल रहा। इसलिए मंदिर का नाम अचल नाथ पड़ा।

जोधपुर के कटला बाजार और कपड़ा बाजार के मध्य स्थित करीब 490 साल प्राचीन शिव मंदिर का इतिहास भी बहुत पुराना है। बताया जाता है कि राव गांगा और उनकी पत्नी रानी नानका देवी ने यह मंदिर उन्हें संतान प्राप्ति के बाद बनाया था। शिवालय के जीर्णोद्धार के बाद मंदिर में दाई तरफ अचल नाथ शिवलिंग और बाएं नर्मदेश्वर शिवलिंग है। माता पार्वती की प्राचीन मूर्ति भी है। मंदिर का शिखर करीब 52 फीट ऊंचा है और इसमें संगमरमर को तराश कर बनाई मूर्तियां बहुत ही आकर्षक और सुंदर है। गर्भ ग्रह के आसपास राम-लक्ष्मण-सीता और राम भक्त हनुमान की संगमरमर की मूर्तियां स्थापित की गई हैं। हर सोमवार को यहां श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है।

महाशिवरात्रि और श्रावण मास में भगवान अचलनाथ की मूर्तियों का बहुत ही सुंदर आकर्षक आभूषणों से वस्तुओं से फूलों से शृंगार किया जाता है। मंदिर का विकास कार्य नेपाली बाबा के समय वर्ष 1971 में शुरू हुआ तब आठ लाख रुपए की राशि विकास पर खर्च किए गए थे। उसके बाद 1995 में महंत ऋषि गिरी के सानिध्य में मंदिर शिखर पर 65 किलो का कलश चढ़ाया गया था। जिसमें 17 तोले सोने की परत भी लगाई गई थी। भव्यता और अलंकरण की दृष्टि से अचल नाथ मंदिर बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। शहर के ठीक बीचोंबीच स्थित होने के कारण लोग इस मंदिर में नियमित रूप से आते हैं। जोधपुर की महारानियों ने कई मंदिर बनाए लेकिन उसमें अचल नाथ मंदिर को बहुत ही खास बहुत ही विशिष्ट स्थान प्राप्त है।

मंदिर सुबह 4 बजे खुलने के बाद शायद ही कोई समय हो जब यहां कोई श्रद्धालुओं ना होता हो। रात 11 बजे मंदिर कपाट बंद होने तक भक्तों का ताता लगा रहता है। सिरोही के राजा राव जगमाल की पुत्री नानक देवी जब मंदिर का निर्माण करवाया तो साथ ही बावड़ी का निर्माण भी करवाया था। जिसका जल आज भी मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान के लिए प्रयुक्त होने के साथ शहरवासियों की प्यास बुझाने में भी काम आ रहा है। मंदिर का जीर्णोद्धार करने वाले संत नेपाली बाबा और ऋ षि गिरि महाराज के बाद अब मुनीश्वर गिरी मंदिर के वर्तमान महंत हैं। जिनके मार्गदर्शन में मंदिर का विकास कार्य प्रगति पर है।