
AGRICULTURE UNIVERSITY--कृषि विवि सफेद तितली के जीवन चक्र पर कर रहा शोध
जोधपुर।
इन दिनों आप सफेद तितलियां उड़ते हुए देख रहे होंगे। इन सफेद तितलियों से उत्पन्न हरी लट औषधीय महत्व की सोनामुखी फसल को सर्वाधिक नुकसान पहुंचा रही है। कृषि विश्वविदय़ालय इन सफेद तितलियों पर नियंत्रण के लिए शोध कर रहा है। हाल ही में, कृषि विवि के वैज्ञानिकों ने कृषि विभाग के साथ जिले का रेपिड रन सर्वे भी किया है। सफेद तितली लेपिडोप्टेरा गण की पाइरीडी कुल की एक कीट है। सामान्य भाषा में इसे मोटल्ड इमीग्रेन्ड कहते है।
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लाइफ साइकिल पर हो रहा शोध
विवि के कीट वैज्ञानिक सफेद तितली के लाइफ साइकिल (जीवन चक्र) पर अध्ययन कर रहे है। इस कीट की चार अवस्थाएं अण्ड़ा, लट (लार्वा), कोष (प्यूपा) व प्रौढ़ (एडल्ट) होती है। अण्ड़ो से निकलने वाली हरी लट फसलों को सबसे ज्यदा खतरा पहुंचा रही है। जो शुरू में फूल-पत्तियों और बाद में पूरे पौधें को नष्ट कर देती है। सोनामुखी के औषधीय उपयोग के कारण लट नियंत्रण के लिए केमिकल का उपयोग भी संभव नही है। वैज्ञानिक सफेद तितली का जीवन कितने दिन का होता है, लार्वा-प्यूपा का जीवन कितने दिन का होता है, यह कहां से आ रही है, इनको कैसे नियंत्रण किया जाए सहित नियंत्रण के उपायों पर शोध कर रहे है।
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70 फीसदी फसल बर्बाद
जोधपुर जिले में करीब 4 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में सोनामुखी की बुवाई हुई है। जिले के फलोदी, बाप, लोहावट, बापिणी, बालेसर, ओसियां आदि क्षेत्रों बुवाई की गई है। क्षेत्र के किसानों के मुताबिक सफेद तितली अब तक करीब 70 फीसदी फसल को बर्बाद कर चुकी है।
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सर्वे के अनुसार, इस कीट ने सोनामुखी फसल को ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। इस कीट के लाइफ साइकिल पर शोध शुरू किया है। उम्मीद है, जल्द ही इसके बचाव के उपाय निकलेंगे।
डॉ मनमोहन सुन्दरिया, कीट विशेषज्ञ
कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर
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इस कीट के प्रकोप के कारण करीब 70 फीसदी फसल नष्ट हो गई है। ऐसे में किसानों को फ सल में बड़े नुकसान की आशंका सता रही है।
कन्हैयालाल, किसान
Published on:
07 Oct 2020 05:40 pm
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