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जहरीली सांस लेने को मजबूर एम्स के मरीज

जोधपुर एम्स के बाहर प्रदुषण का स्तर 246 पीएम, एम्स के सामने औद्योगिक इकाइयां और ट्रासपोर्ट नगर शिफ्ट करने की जरूरत

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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती होने वाले मरीज औद्योगिक इकाइयों के निकलने वाले धुंए के काले साये में इलाज कराने को मजबूर है। ये बात यहां उद्यमी, ट्रांसपोर्ट्स और स्थानीय जनप्रतिनिधि सभी जानते हैं लेकिन वे अपने अपने हितों और स्वार्थों को देखते हुए इस बारे में कोई कारगर पहल नहीं कर रहे हैं। इस वजह से पिछले कुछ सालों से इस ट्रांसपोर्ट नगर और प्रदुषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों को यहां से कहीं अन्यत्र शिफ्ट करने की प्लानिंग ठंडे बस्ते में चली गई है।

अब भयावह स्थिति यह है कि एम्स के बाहर प्रदुषण का स्तर 246 पीएम तक पहुंच गया है जबकि देश में राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता मानकों के अनुसार 100 आरएसपीएम से प्रदुषण होते ही हमारे स्वास्थ्य के लिए प्रतिकुल असर पडऩे लग जाता है। यहां तो उससे ढाई गुना ज्यादा प्रदुषण है और वह भी जब सामने ही एम्स हो जहां रोजाना सैकड़ों मरीज भर्ती होते हैं।

एम्स के बाहर प्रदुषण भारी वाहनों व फैक्ट्रियों का धुंआ और धूल मिट्टी के कणों से होता है। एम्स के सामने औद्यागिक इकाइयां और ट्रांसपोर्ट नगर प्रदुषण के दो बड़े कारण है। प्रदुषण कंट्रोल बोर्ड के आंकड़े बता रहे हैं कि अगर इस प्रदुषण को नियंत्रित नहीं किया तो निकट भविष्य में यहां हालात और ज्यादा बिगड़ जाएंगे।

यहां बहुत जल्द ट्रोमासेंटर इमरजेंसी सुविधाएं शुरू होने वाली है। ऐसे में मरीजों की संख्या बढेगी। उस समय प्रदुषण से मरीजों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ सकता है। आरएसपीसीबी के रीको ऑफिस इंडस्ट्रीयल एरिया के अनुसार 12 जून को एम्स और उसके आसपास के क्षेत्र में प्रदुषण का स्तर 246 पीएम दर्ज किया गया है। कई बार ये स्तर 300 पीएम से भी ऊपर चला जाता है।

इसलिए ठंडे बस्ते में चली गई योजना

एम्स के सामने दाऊजी होटल चौराहे के पीछे ट्रांसपोर्ट नगर को शिफ्ट करने के लिए यहां से मोगड़ा स्थित 336 बीघा में क्षेत्र में योजना बनी थी। इसके लिए जेडीए के टाऊन प्लानर ने नक्शा भी बनाया था। उसमें सड़कों की चौड़ाई 40 फुट से बढाकर 100 फुट या उससे ज्यादा करने के लिए ट्रांसपोर्टरर्स ने अनुशंसा की।

जिस पर इस नक्शे को भविष्य में वाहनों के दबाव को देखते हुए सड़कों की चौड़ाई बढाने और ट्रांसपोर्टर्स की सुविधा के लिए दुबारा नक्शा बनाना तय किया लेकिन उसके बाद यह प्रक्रिया आगे नहीं बढी।

ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि यहां जमीन भू रूपांतरण को लेकर भी अड़चन आई थी। क्योंकि यह जमीन गोचर भूमि घोषित है ऐसे में इसे भू रूपांतरण के लिए गेंद राज्य सरकार के पाले में आ गई। उसके बाद फिर योजना का क्रियान्वयन हो ही नहीं पाया।

एम्स के सामने से औद्योगिक इकाइयां नहीं हुई शिफ्ट

एम्स के सामने प्रदुषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयां वहीं की वहीं है। इस संबंध में पिछली कांग्रेस सरकार के समय बात प्लान बना लेकिन उसे मूर्त रूप नहीं दिया जा सकता। इसमें राजनीतिक कारण भी सामने आने के भी संकेत मिले हैं। यहां एम्स प्रशासन की ओर से औद्योगिक इकाइयां हटाने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी लेकिन उस समय कार्रवाई के नाम पर रीको ने एम्स के सामने ट्रांसपोर्ट के ऑफिस तो हटाकर इतिश्री कर ली।

लेकिन एम्स के सामने आज दिन तक प्रदुषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयां नहीं हटी। उस समय यह भी बात उठी थी कि जब सरकार ने एम्स के सामने कई साल पहले औद्योगिक क्षेत्र घोषित किया था। अब यहां से औद्योगिक इकाइयां कैसे हटाएं। उसके बाद यहां कोई कार्रवाई नहीं हुई।

स्वीकृति पर आकर अटक गई बात

ट्रांसपोर्टस और जेडीए के बीच हुई वार्ता में जेडीए के तत्कालीन आयुक्त और चेयरमैन की ओर से कहा गया था कि मोगड़ा में ट्रांसपोर्टर नगर के लिए निर्धारित जमीन का गोचर भूमि से भू रूपांतरण कराने के लिए फाइल राज्य सरकार को भेजी हुई है।वहां से स्वीकृति मिलते ही यहां काम शुरू कर दिया जाएगा। उसके बाद इस योजना में क्या हुआ क्या नहीं, ये हमें अभी नहीं बताया गया है। - वीरेंद्र त्रेहान, सचिव, सूर्यनगरी, गुड्स ट्रांसपोर्ट ऑनर्स वेलफेयर सोसायटी, ट्रांसपोर्ट नगर बासनी।

रीको औद्योगिक क्षेत्र में इस माह प्रदुषण का स्तर

1 जून 214

5 जून 313

8 जून 173

12 जून 246

(राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता मानकों के अनुसार)

मरीजों के फेफड़ों में भर सकता है दमा

एम्स के बाहर ट्रांसपोर्ट नगर से निकलने वाला धुंआ मरीजों के साथ यहां से निकलने वाले राहगीरों के लिए भी खतरनाक है। औद्योगिक क्षेत्र के आसपास रहने वाले परिवारों को धुंए से बचने की जरूरत है। कैमिकल के धुंए से फेफड़ों को सीधा नुकसान होता है। इससे एम्स में भर्ती होने वाले मरीजों को एलर्जी, अस्थमा होने की संभावना ज्यादा है। एम्स के सामने औद्योगिक क्षेत्र होना ही नहीं चाहिए। एम्स में मरीज धुंए की वजह से मास्क लगाकर नहीं रख सकते।

- डॉ. नवीन दत्त, पल्मोनरी मेडिसिन, एम्स।

ट्रांसपोर्ट नगर को हटाने के लिए पहले आंगणवा और उसके बाद मोगड़ा में जमीन फाइनल कर दी थी लेकिन उसके बाद वहां ट्रांसपोर्ट नगर शिफ्टिंग का काम नहीं हुआ। अब एम्स के सामने औद्योगिक इकाइयों को हटाने को लेकर प्रेक्टिली कोई काम तो नहीं हुआ अभी तक लेकिन मौखिक रूप से जरूर इसकी बातचीत होती रही है।

हालांकि अब इस मुद्दे पर प्राथमिकता से गौर किया जाएगा। अब रोहिट रोड के पास नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की जो योजना है उसमें एम्स के सामने की औद्योगिक इकाइयों को शिफ्ट करने कोशिश करेंगे। - गजेंद्र सिंह शेखावत, सांसद व मेंबर, गवर्निंग बॉडी, एम्स।

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