वीडियो : नंदकिशोर सारस्वत/जोधपुर. न्यू चांदपोल रोड स्थित पहाडिय़ों के मध्य में स्थित अजनेश्वर आश्रम विश्व का एक अनूठा महिला संत आश्रम है जहां सभी महिला संतों के नाम पुरुषों के नाम पर है। अजनेश्वर आश्रम के वर्तमान पीठाधीश संत शांतेश्वर ने बताया कि वास्तविक सन्यास के बाद न तो यह शरीर पुरुष और ना ही स्त्री होता है। इसका भान होना भी सन्यास की मर्यादा को तोड़ता है। सन्यास के बाद शरीर सच्चिदानंद स्वरूप होता है। आश्रम की महिला संत कभी भिक्षा मांगने बाहर नहीं जाते। आश्रम में किसी भी तरह की भेंट राशि देना भी सख्त मना है। विशेष त्योहार पर जागरण को छोड़ सूर्यास्त के बाद किसी भी पुरुष का आश्रम में रुकना वर्जित है। आश्रम के संस्थापक संत अजनेश्वर ने 156 साल पूर्व (विक्रम संवत 1920) याने सन् 1863 में मात्र 12 वर्ष की अल्पायु में सन्यास ग्रहण करने के बाद आश्रम की पथरीली चट्टान पर कड़ी तपस्या की थी। बुजुर्ग महिला संतों की सेवा के लिए सेवादार भी महिलाएं हैं और अनुयायी महिलाएं नियमित रूप में आश्रम में सेवाएं प्रदान करती हैं।