
ancient havelis of phalodi
शहर के विरासती वैभव में चार-चांद लगाने वाली प्राचीन हवेलियां व भवन संरक्षण के अभाव में जर्जर हालात में पहुंच चुके हैं। ऐसे में मानसून की दस्तक के साथ ही इन जर्जर भवनों के धराशायी होने का खतरा मंडराने लगा है। लिहाजा आस-पास निवास करने वाले लोगों को इन भवनों के ढहने से बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है। इन हवेलियों के धराशायी होने की स्थिति में लोगों को जान का खतरा भी सताने लगा है।
100-200 साल प्राचीन है हवेलियां
शहर में स्थित अधिकांश प्राचीन हवेलियां करीब 150-200 साल पुरानी है। यह हवेलियां शहर के सेठ-साहूकारों द्वारा बनाई गई थी। जिनके कलात्मक जाली, झरोखे और लकड़ी से निर्मित छतें आज भी पर्यटकों को लुभाती है। जो समय व मौसम की मार से अब जर्जर हालात में है। जिसके चलते इन हवेलियों के कभी भी धराशायी होने का अंदेशा बना रहता है।
संरक्षण हो तो सुधरे हालात
फलोदी शहर की पहचान में चार चांद लगाने वाली इन कलात्मक हवेलियों के संरक्षण के लिए मालिकों व राज्य सरकार को पहल करनी चाहिए। ताकि जर्जर हाल में पहुंच चुकी इन कलात्मक हवेलियों की सेहत में सुधार हो तथा ये ऐतिहासिक विरासतें लोगों के लिए आफत न बनकर शहरवासियों के लिए गौरव के प्रतीक बन सके।
नगरपालिका ने दी थी चेतावनी
नगरपालिका मंडल, फलोदी ने गत वर्ष बारिश के मौसम में हादसों की आशंका को लेकर शहर में पुराने एवं जर्जरहाल मकानों के मालिकों को उनके मकान गिराने की चेतावनी दी थी।
नगरपालिका की ओर से जारी चेतावनी में बताया गया था कि शहर में वर्षों पुराने एवं जर्जर अवस्था में पहुंच चुके मकान बारिश के मौसम में कभी भी ध्वस्त हो सकते हैं जिससे जनहानि हो सकती है।
नगरपालिका मंडल ने सूने पड़े जीर्ण-शीर्ण मकान मालिकों को अपने मकान गिराने की चेतावनी देते हुए कहा था कि दूसरी स्थिति में नगरपालिका द्वारा जीर्ण-शीर्ण मकानों पर राजस्थान नगरपालिका अधिनियमों के तहत कार्रवाई करके इन्हें ध्वस्त किया जाएगा और मकान मालिक से इसका हर्जाना वसूल किया जाएगा। साथ ही पालिका द्वारा स्वामित्व निरस्त कर भवनों को अपने कब्जे में ले लिया जाएगा। लेकिन नगर पालिका द्वारा चेतावनी देने के बाद कोई विशेष कार्रवाई नहीं की गई।
उपेक्षा की शिकार हवेलियां
शहर की अधिकांश प्राचीन हवेलियों के मालिक व्यवसाय के लिए सालों पहले फलोदी से तमिलनाडु, आन्ध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, छतीसगढ़ जाकर रहने लगे और यहां की हवेलियों का रख-रखाव ही भूल गए। ऐसे में फलोदी शहर की अधिकांश हवेलियों पर ताला लगा हुआ है। जिसके चलते ये हवेलियां दिनों-दिन जर्जर होती जा रही है तथा कुछ हवेलियां तो खण्डहर में तब्दील हो गई है।
शहर के वेदों का वास, उम्मेदपुरा, पत्थर रोड़, राईकाबाग व पारसपुरा इलाकों की प्राचीन हवेलियों व अन्य भवनों के जर्जर होने के कारण आए दिन कभी उनकी दीवारें ढहना, तो कभी छतें और कभी इन हवेलियां में आई दरारों से मलबा गिरने से आस-पास रह रहे लोगों को जर्जर हवेलियों के ढहने से हादसे का खतरा बना रहता है। गौरतलब है कि गत मानसून की पहली बारिश में ही शहर के करीब 30-40 जर्जर भवन धराशायी हो चुके थे। ऐसे में धराशायी होते इन भवनों से आस पास निवास करने वाले लोगों की जान खतरे में है।
जर्जर मकानों की ढहाने की मांग
पारसपुरा, फलोदी निवासी पारसमल भंसाली ने अधिशासी अधिकारी, उपखण्ड अधिकारी को ज्ञापन सौंप कर बताया कि उनके मकान के निकट करीब 100 साल पुराने दो मकान स्थित है। जो वर्तमान में जर्जर हाल में है। जिसमें से एक मकान का अधिकांश भाग कुछ समय पूर्व बारिश में ढह गया था। साथ ही अब दोनों मकानों के बाहरी भाग में बड़ी दरारें आई हुई है। इससे धराशायी होने से कभी-भी जनहानि हो सकती है। उन्होने बताया कि इस सन्दर्भ में करीब वर्ष पूर्व 31 जुलाई 2015 को नगर पलिका को अवगत करवाया गया था। लेकिन एक साल बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने इन जर्जर मकानों को ढहाने की मांग की है।
होगी कार्रवाई
काफी मकान मालिकों को जर्जर मकानों के ढहने से हादसे की आशंका को देखते हुए सूचित कर दिया गया था। साथ ही इस संदर्भ में जो भी शिकायत मिलेगी, वहां कार्रवाई की जाएगी।
- त्रिकमदान चारण, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका, फलोदी
Published on:
11 Jun 2016 01:38 am
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