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आसाराम को जेल में ही सुनाया जाएगा फैसला, समर्थकों के हंगामे की आशंका के चलते लिया गया निर्णय

आसाराम को समर्थकों के हंगामे व शहर की सुरक्षा के चलते जेल में ही फैसला सुनाया जाएगा।  

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Asaram Rape Case Final Verdict to be made in Jodhpur Central Jail

Asaram Rape Case Final Verdict to be made in Jodhpur Central Jail

जोधपुर। यौन उत्पीडऩ आरोपी आसाराम के मामले में जेल में ही फैसला सुनाने के लिए पुलिस ने कोर्ट में याचिका दायर की थी। मंगलवार को इस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस जीके व्यास की खंडपीठ ने आसाराम को फैसला 25 अप्रेल को जेल में ही सुनाने के आदेश दिए। पुलिस ने इसके लिए हाईकोर्ट में अर्जी दी थी। दरअसल डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को सजा सुनाए जाने के बाद पंचकुला में जबरदस्त हिंसक प्रदर्शन हुआ था। दरअसल पंचकुला में सीबीआई की विशेष अदालत ने दो शिष्याओं से बलात्कार के मामले में गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दे दिया था। इसके बाद भड़की हिंसा में पंचकुला में 35 और सिरसा में छह लोग मारे गए जबकि डेरा समर्थकों ने सैकड़ों वाहनों में आग लगा दी थी। वही हालात अब राजस्थान की न्यायिक राजधानी में ना पैदा हों, इसके लिए जिला पुलिस चिंता में थी। आदेश के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली है।

इससे पहले सोमवार को एसटी-एससी कोर्ट, जिसमें पोक्सो मामलों की सुनवाई का अधिकार भी निहित है, में पीडि़ता के अधिवक्ता पीसी सोलंकी की ओर से धारा 340 के अंतर्गत पेश आवेदन पर सुनवाई पूरी हुई। पीठासीन अधिकारी मधुसुदन शर्मा ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अर्जी पर आदेश आगामी 25 अप्रेल तक के लिए सुरक्षित कर लिया। इसी रोज आसाराम मामले का फैसला सुनाया जाना है।

अपने ही गुरुकुल की नाबालिग छात्रा के साथ यौन उत्पीडऩ के आरोपी आसाराम के विगत साढ़े चार साल से जारी मामले की अंतिम सुनवाई के बाद 7 अप्रेल को एससी-एसटी कोर्ट के पीठासीन अधिकारी मधुसुदन शर्मा ने मामले का अंतिम निर्णय सुनाने के लिए 25 अप्रेल का दिन मुकर्रर कर दिया था। वहीं उसी रोज पीडि़ता के अधिवक्ता पीसी सोलंकी ने धारा 340 के अतंर्गत एक अर्जी भी कोर्ट में पेश की थी, जिस पर सोमवार को बहस हुई। इसके बाद अर्जी पर आदेश भी 25 अप्रेल के लिए सुरक्षित रख लिया गया।

क्या कहा था अर्जी में

दरअसल पीडि़ता के अधिवक्ता पीसी सोलंकी ने आसाराम पर आरोप लगाया है कि कोर्ट मे पीडि़ता की उम्र को लेकर दो दस्तावेज आसाराम की ओर से पेश किए गए थे, जिसमें एक स्कूल की टीसी में कक्षा नर्सरी और प्रेप में पीडि़ता को पढऩा बताया गया है। टीसी के हिसाब से पीडि़ता घटना के समय नाबालिग नहीं बताई गई, चूंकि कोर्ट में कक्षा प्रेप व नर्सरी की टीसी सबूत के तौर पर काम नहीं आ सकती। इसके बाद इसी विद्यालय की एक और टीसी पेश की गई, जिसमें पीडि़ता को विद्यालय में कक्षा नर्सरी, प्रेप, कक्षा एक व दूसरी में पढऩा बताया गया है। इन दोनों दस्तावेज में किसी के भी हस्ताक्षर नहीं है और ना ही किसी प्रकार की मोहर लगी है।