
Jodhpur Mojari. Photo- Patrika
Jodhpur Mojari Gets GI Tag: जोधपुर की पारंपरिक मोजड़ी शिल्पकला को भौगोलिक संकेतक ( जीआइ टैग ) का आधिकारिक प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया है। भारत सरकार के भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्री चेन्नई की ओर से जारी प्रमाण पत्र के अनुसार ‘ मोजड़ी क्राफ्ट ऑफ जोधपुर ( राजस्थान ) ’ का पंजीकरण जीआइ संख्या 735 के तहत किया गया है। प्रमाण पत्र के अनुसार इस जीआइ का पंजीकरण जोधपुर हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्ट्स एसोसिएशन और ग्राम विकास सेवा संस्थान , पीपाड़ सिटी के नाम पर किया गया है।
इस प्रक्रिया में विकास आयुक्त ( हस्तशिल्प ), वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार तथा टेक्सटाइल्स कमेटी, वस्त्र मंत्रालय ने सुविधा प्रदाता की भूमिका निभाई। प्रमाणपत्र के मुताबिक यह पंजीकरण 4 जनवरी, 2021 से प्रभावी माना गया है तथा 28 मार्च 2026 को चेन्नई स्थित जीआइ रजिस्ट्री की ओर से आधिकारिक प्रमाणपत्र जारी किया गया। एसोसिएशन को यह प्रमाण पत्र गुरुवार को ही मिला। यह पंजीकरण क्लास 18 एवं 25 (फुटवियर) के अंतर्गत किया गया है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष भरत दिनेश ने बताया कि जीआइ टैग मिलने से अब जोधपुर की पारंपरिक मोजड़ी को देश-विदेश में विशिष्ट पहचान मिलेगी। इससे स्थानीय कारीगरों, हस्तशिल्प उद्योग और निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। एसोसिएशन के सचिव राजेन्द्र मेहता ने बताया कि केवल निर्धारित भौगोलिक क्षेत्र में पारंपरिक तरीके से निर्मित मोजड़ी ही ‘मोजड़ी क्राफ्ट ऑफ जोधपुर’ नाम से बाजार में बेची जा सकेगी, जिससे नकली उत्पादों पर भी अंकुश लगेगा ।
जोधपुर और राजस्थान की पहचान बने लहरिया , साफा , मथानिया मिर्च और राजस्थानी जीरा सहित सात उत्पादों को भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है । अहमदाबाद स्थिति जीआइ रजिस्ट्री कार्यालय में इनकी अंतिम सुनवाई फरवरी में पूरी हो चुकी है। इनको भी अब जीआई टैग मिलने का इंतजार है । गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका ने ‘ जोधपुर मांगे जीआई टैग ’ शीर्षक से इन पांचों वस्तुओं के लिए अभियान चलाया था । इनकी आवेदन प्रक्रिया में राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) का सहयोग है ।
संसद ने 1999 में रजिस्ट्रेशन एंड प्रोटेक्शन एक्ट के तहत ज्योग्राफिकल इंडिकेशन ऑफ गुड्स लागू किया था। इस आधार पर किसी भी क्षेत्र में पाई जाने वाली किसी खास वस्तु का कानूनी अधिकार संबंधित राज्य को दे दिया जाता है। जीआइ टैग मिलने के बाद कोई भी निर्माता विशिष्ट नाम का दुरुपयोग नहीं कर सकता ।
Updated on:
10 Jul 2026 02:05 pm
Published on:
10 Jul 2026 01:59 pm
