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एशिया की सबसे बड़ी घी की मंडी में खपत हुई कम

- कोरोना का असर- गुजरे सात माह में 3500 से घटकर 1500 टिन प्रतिदिन हो रही खपत- आगामी त्योहारों, शादियों के सीजन में भी विशेष खपत की उम्मीद नहीं

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जोधपुर

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Amit Dave

Oct 14, 2020

एशिया की सबसे बड़ी घी की मंडी में खपत हुई कम

एशिया की सबसे बड़ी घी की मंडी में खपत हुई कम

जोधपुर।
कोरोना काल में देशी घी का व्यापार भी खासा प्रभावित हुआ है। एशिया की सबसे बड़ी देशी घी की मंड़ी के रूप में मशहूर जोधपुर में घी की खपत घट गई है। गुजरे सात माह में देशी की विशेष बिक्री नहीं हुई। जहां कोरोना काल से पहले यानि फरवरी माह तक प्रतिदिन औसतन 3500-4000 टिन की खपत हुआ करती थी। वहीं कोरोना काल शुरू होने से घी की खपत कम होना शुरू हो गई, और अभी तक यहीं स्थिति बनी हुई है। वर्तमान में प्रतिदिन 1500-2000 टिन की खपत हो रही है। पूरे जिले में जोधपुर से ही घी की सप्लाई होती है।देशी घी की आम दिनों के साथ विवाह-शादियों, रामदेवरा सहित अन्य बड़े मेलें, मंदिरों, भण्ड़ारों, धार्मिक आयोजनों आदि में घी की खपत होती रहती है, कोरोना के कारण यह खपत भी नहीं हो रही।
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व्यापारी माल कम मंगा रहे
जोधपुर में पंजाब, हरियाणा, मध्यप्रदेश, अलीगढ (उत्तर प्रदेश) व राजस्थान से धौलपुर व रींगस से घी की सप्लाई होती है। बीते सात माह से घी की खपत कम हो जाने से व्यापारी भी नया माल कम मंगा रहे है।
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देशी घी की मांग व खपत होने से व्यापारी भी कम माल मंगा रहे है। आगामी त्योहारों व शादियों की सीजन में भी घी की विशेष खपत की उम्मीद नहीं है। होली से पहले देशी घी की बड़ी मांग व खपत की उम्मीद कम है।
मुरली पारीक, घी-तेल होलसेल व्यापारी
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कोरोना से पैदा हुई समस्या के अलावा केन्द्र सरकार की ओर से कृषि अध्यादेश लागू करने से भी व्यापारी उलझन में है। देशी घी पर 1.60 प्रतिशत मंडी टेक्स व 1 प्रतिशत कृषक कल्याण कर दे रहे है। इससे भी व्यापार प्रभावित हो रहा है।
सीपी मूथा, घी-तेल होलसेल व्यापारी

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