19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पीरों के पीर रामापीर, हरे सब की पीर

-जन-जन की आस्था का केंद्र मसूरिया रामदेव मंदिर

2 min read
Google source verification
latest news,News in Hindi,jodhpur news,

बासनी(जोधपुर). मसूरिया का नाम जुबां पर आते ही बाबा रामदेव मंदिर मानस पटल पर छा जाता है। जन-जन की आस्था व भावनाओं को प्रकट करने का केंद्र मसूरिया का प्रसिद्ध बाबा रामदेव मंदिर श्रद्धालुओं का अब नए रुप में स्वागत करने को तैयार है। मंदिर का इन दिनों छित्तर के पत्थरों से नक्काशी का कार्य हो रहा है, जिससे मंदिर की छटा ही निराली नजर आ रही है। मंदिर में जहां दर्शन करने आने के लिए श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग रैलिंग की गई है, वहीं इसकी सुंदरता में भी कोई कमी नहीं छोड़ी गई है।

एक घंटे तक चलती है आरती
मंदिर में सुबह व शाम दोनों समय आरती होती है। दोनों आरती का समय भी एक सा ही रहता है। प्रभात व संध्या के समय की आरती 6 बजकर 25 मिनट पर शुरु होती है जो 7 बजकर 25 मिनट तक होती है। आरती के दौरान सर्वप्रथम बाबा रामदेव की आरती उतारी जाती है, उसके पश्चात बाबा रामदेव के प्रिय घोड़े लीले की आरती उतारी जाती है। खास बात यह है कि मंदिर में जिस दरम्यान बाबा रामदेव की आरती उतारी जाती है, ठीक उसी समय मंदिर के ऊपरी हिस्से में स्थापित गुरु बालिनाथ की प्रतिमा की आरती उतारी जाती है। बालिनाथ की प्रतिमा के समीप ही घोड़े पर सवार बाबा की भी प्रतिमा स्थापित है। मंदिर में आरती करने के लिए दो पुजारी हैं। आरती करने के पश्चात परचा बावड़ी में भभूत को विर्सजित कर दिया जाता है।

प्रसाद
मंदिर में प्रसाद के रुप में मुख्यत: नारियल, मखाना व मेवे की मिठाइयां चढ़ाई जाती है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु रामदेवजी के प्राण प्रिय घोड़े को चढ़ाने के लिए चने लेकर आते हैं व घोड़े के प्रतिरुप पर पुष्प माला अर्पित कर अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं।

वीआईपी के लिए बना अलग द्वार
मंदिर परिसर में प्रवेश करने के लिए दो द्वार हैं। जिनमें से एक आम जन के लिए है वहीं दूसरा द्वार वीआईपी के लिए रखा गया है। मंदिर परिसर में प्रवेश करने से लेकर मंदिर में स्थित प्रतिमा स्थल तक पहुंचने के लिए लम्बी रैलिंग बनाई गई है। जिसमें महिला , पुरुषों व निशक्त लोगों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं। हाल ही में मंदिर के बाहर के हिस्से में जोधपुर के प्रसिद्ध छितर के पत्थर से कलाकारी की गई है। वहीं कुछ जगहों पर नक्काशी का कार्य चल रहा है। मंदिर के अंदर प्रवेश करने पर बाबा रामदेव की सोने व चांदी से बनी प्रतिमा के दर्शन होते हैं। राजस्थान में ऐसा कुछ ही मंदिरों में देखने को मिलता है। समीप में ही रामदेव जी के घोड़े की प्रतिमा है। मंदिर में प्रसिद्ध परचा बावड़ी भी है, जिसके बारे में मान्यता है कि इस पानी में स्नान करने से शरीर के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। यही वजह है कि यहां वर्ष भर आस्था के इस कुंड में डुबकी लगाने के लिए आते हैं।

विशेष
यहां बाबा रामदेवजी के गुरु बालिनाथ का समाधी स्थल है व रामदेवजी की प्रतिमा स्थित है। मंदिर के बारे में मान्यता है कि जो भी भक्त रामदेवरा में बाबा रामदेव के दर्शनार्थ जाता है उसे पहले मसूरिया में आकर धोक लगाना जरुरी है।