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उपेक्षा की त्रासदी का शिकार बाईजी का तालाब

तालाब यात्रा-2

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उपेक्षा की त्रासदी का शिकार बाईजी का तालाब

उपेक्षा की त्रासदी का शिकार बाईजी का तालाब

जोधपुर। उपेक्षा की त्रासदी, मरहम लगाने के नाम पर केवल परियोजना रिपोर्ट बनाने और लाखों रुपए बर्बाद करने की जिद्द। पिछले दो दशक में शहर के हृदय स्थल जालोरी गेट के समीप स्थित बाईजी के तालाब ने यही सितम झेला है। आलम यह है कि आज इस तालाब को देखकर कोई नहीं कह सकता कि यह कभी स्वच्छ पानी का जलाशय था।
मलबे का डंपिंग स्टेशन बन चुके इस तालाब को संवारने के ख्वाब नगर निगम पिछले कई बजट में दिखा चुका है, लेकिन हर बार पैसों की तंगी ने इस जल निकाय को बदहाली पर छोड़ दिया। इस तालाब का निर्माण 1826 में जालोरी बारी और सोचती गेट की बारी के बीच में शहर परकोटे के पास करवाया गया था। कुछ दशक पूर्व तक बाईजी का तालाब में शहर के दक्षिण पश्चिमी हिस्से के ऊंचाई वाले क्षेत्रों से नहर के माध्यम से साफ पानी की आवक होती थी। बाद में धीरे-धीरे नहरों में जगह-जगह अतिक्रमण हो गया और पानी की आवक बंद हो गई। पिछले कुछ सालों में आसपास के लोग इसमें न केवल कचरा डाल रहे हैं, बल्कि गंदे पानी की निकासी कर रहे हैं। इसके चलते तालाब पूरी तरह प्रदूषित हो चुका है।

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योजना दर योजना के सब्जबाग
1. लाखों खर्च, नतीजा सिफर:

बाईजी के तालाब को लेकर पिछले दो दशक में नगर निगम ने कई योजनाओं को केवल कागजों में मूर्त रूप दिया है। धरातल पर एक भी योजना ने अमलीजामा नहीं पहना। यह अलग बात है कि परियोजना रिपोर्ट बनाने के नाम पर कंसल्टेंट कंपनियों को लाखों रुपए का भुगतान किया जाता रहा है। यहां तक कि लाखों का खर्च भी बेमानी साबित हुआ। मसलन, निगम ने वर्ष 2013 में बाईजी का तालाब से 16774 घन मीटर मलबा निकालने का दावा किया था, जिस पर 37.90 लाख रुपए का खर्च आया। अतिक्रमण को रोकने के नाम पर तालाब के उत्तर पूर्व में 16 लाख रुपए की लागत से दीवार भी निर्मित की गई, लेकिन तालाब की दुर्दशा बदस्तूर जारी रही।

2. पचास करोड़ की योजना:

निगम ने तालाब के सौंदर्यीकरण के लिए मैसर्स वाप्कोस लिमिटेड अहमदाबाद को तालाब के आसपास जल क्षेत्र का विकास, बहुमंजिला पार्किंग, स्पोर्ट्स परिसर, बजट होटल, एक्वेरियम, शॉपिंग काम्प्लेक्स, फूड कोर्ट, रेस्टोरेंट, म्यूजिकल फाउंटेन तथा नाइट लाइटिंग के लिए परियोजना रिपोर्ट बनाने का जिम्मा दिया, जिसके अनुसार बाईजी का तालाब को संवारने पर करीब 50 करोड़ का खर्च अनुमानित था। खर्च को देखकर निगम ने परियोजना से हाथ खींच लिए।


3. अब 7.22 करोड़ की योजना:

हाल ही में निगम ने बाईजी का तालाब के जीर्णोद्धार और विकास के लिए कंसलटेंट के माध्यम से 7.22 करोड़ रुपए की विस्तृत योजना तैयार की है, जिसमें तालाब के चारों तरफ कलात्मक पत्थर की चारदीवारी, मुख्य द्वार, उद्यान क्षेत्र, म्यूजिकल फाउंटेन, बच्चों के झूले और भ्रमण पथ का निर्माण शामिल है। इस कार्य में विद्युतीकरण एवं पार्किंग स्थल का भी प्रस्ताव है।

4. और इससे भी पल्ला झाड़ लिया:

यह प्रस्ताव अमल में आ पाता, इससे पहले ही निगम ने पल्ला छुड़ाते हुए मामला जोधपुर विकास प्राधिकरण के हवाले कर दिया है। निगम के अधिकारियों का कहना है कि जोधपुर विकास प्राधिकरण द्वारा शहर में हेरिटेज लूप पाथ के तहत 100 करोड़ रुपए की लागत से वृहद परियोजना का कार्य किया जा रहा है। इसके अंतर्गत सुगम यातायात एवं हेरिटेज सुधार का कार्य प्रस्तावित है। बाईजी के तालाब का भविष्य भी इसी योजना पर निर्भर करेगा।