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बैंक मैनेजर देते थे बड़ी राशि व खाता नम्बर की जानकारी

- स्कैनर व कलर प्रिंटर से बनाए फर्जी चैक से वृद्धा के बैंक खाते से निकाले थे 49 लाख रुपए- शिकारगढ़ की क्रिकेट अकादमी से पकड़ में आए थे मुख्य आरोपी व उसका सहयोगी

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बैंक मैनेजर देते थे बड़ी राशि व खाता नम्बर की जानकारी

बैंक मैनेजर देते थे बड़ी राशि व खाता नम्बर की जानकारी

जोधपुर.
वृद्धा के बैंक खाते से फर्जी चेक के जरिए 49 लाख रुपए निकालकर दूसरे खाते में ट्रांसफर कराने के मामले में पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ इलाहाबाद के प्रबंधकों की भूमिका भी सामने आई है। मुम्बई स्थित पंजाब नेशनल बैंक के मैनेजर ने जोधपुर में क्रिकेट अकादमी से जुड़े जितेन्द्रसिंह व उसके साथियों को वृद्धा के पंजाब नेशनल बैंक के खाते में बड़ी राशि होने और खाता नम्बर बताए थे। फिर जितेन्द्रसिंह ने स्कैनर व कलर प्रिंटर से पंजाब नेशनल बैंक का फर्जी चेक बनाकर महिला के खाते से 49 लाख रुपए उत्तर प्रदेश के अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए थे। अब पुलिस बैंक मैनेजरों को भी गिरफ्तार करेगी।

आरोपी के जोधपुर में होने पर खुली वारदात
प्रशिक्षु आरपीएस व थानाधिकारी मंगलेश चूण्डावत ने बताया कि प्रकरण में गत २२ नवम्बर को यूपी में प्रयागराज निवासी इरशाद अली, मोहम्मद जुबेर, लखनऊ निवासी विनय, हरदोई निवासी तौसिब अहमद व मूलत: व्यास कॉलोनी हाल कुड़ी भगतासनी हाउसिंग बोर्ड निवासी जितेन्द्रसिंह को गिरफ्तार कर जेल भिजवाया गया है। जितेन्द्र को पीएनबी मुम्बई के एक मैनेजर ने मसूरिया निवासी पतासी देवी के बैंक खाता नम्बर व उसमें बड़ी राशि होने की जानकारी दी थी। जितेंद्र ने बैंक का फर्जी चेक बनाया था और फिर 49 रुपए भरकर राशि यूपी के खातों में ट्रांसफर कर ली थी। इसके लिए इरशाद व अन्य आरोपी जोधपुर आए थे और फिर यूपी के बैंक खातों से राशि निकाल ली थी। जांच में इरशाद की भूमिका सामने आ गई थी। गत नवम्बर में वह जोधपुर आया था। उसे शिकारगढ़ में पठान क्रिकेट अकादमी से पकड़ा गया था। पूछताछ के बाद अकादमी संचालक के भाई जितेन्द्रसिंह सिख को भी गिरफ्तार किया गया था। बैंक ऑफ इलाहाबाद दिल्ली के मैनेजर ने भी खाता नम्बर व राशि की जानकारी दी थी। जितेन्द्र के घर से लेपटॉप व प्रिंटर आदि बरामद किए गए थे।

खाता धारक के मोबाइल नम्बर की सिम हासिल की
खाते की जानकारी मिलते ही आरोपियों ने खाताधारक पतासीदेवी के बैंक रिकॉर्ड वाले मोबाइल नम्बर की सिम ब्लॉक करा दी थी। फिर फर्जी दस्तावेज से उसी नम्बर की फर्जी सिम जितेन्द्र ने हासिल की थी। 49 लाख रुपए ट्रांसफर कराने के लिए बैंक प्रबंधन ने पुष्टि के लिए खाता धारक के मोबाइल नम्बर पर बात की थी। यह कॉल जितेन्द्र के पास गया था। उसने महिला की आवाज में राशि ट्रांसफर करने की पुष्टि की थी।

बैंक ने वृद्धा को ब्याज सहित लौटाई राशि
पूरे मामले में बैंक प्रबंधन की बड़ी लापरवाही सामने आई थी। फर्जी चेक से 49 लाख रुपए ट्रांसफर करवा लिए गए थे। एेसे में बैंक की तरफ से वृद्धा को ब्याज सहित ४९ लाख रुपए लौटाए गए हैं।