
Camel Fair did not increase the number of camels in the Pushkar fair
गजेंद्रसिंह दहिया/जोधपुर. थार में जैव विविधता बदलाव का सबसे अधिक सामना राज्य पशु ऊंट को करना पड़ रहा है। पिछले तीस साल में 4 लाख से अधिक ऊंट कम हो गए। आजादी के बाद राजस्थान में ऊंटों की संख्या में यह सबसे बड़ी गिरावट है। वर्तमान में प्रदेश के कुल पालतू पशुओं में ऊंटों की आबादी महज आधा फीसदी है जो चिंता का विषय है। इसके उलट अरब और अफ्रीका में ऊंटों की आबादी में लगातार वृद्धि हो रही है। विश्व में कुल 1.4 करोड़ ऊंट हैं, जिसमें नब्बे फीसदी से अधिक अफ्रीका में है।
राजस्थान में राजस्व विभाग ने आजादी के बाद 1951 में पहली पशु गणना की थी। इस दौरान 3.41 लाख ऊंट थे। इसके बाद ऊंटों की संख्या लगातार बढ़ती गई और 1983 में 7.56 लाख तक पहुंची। उस समय यह कुल पालतू पशुओं का दो फीसदी थी। यहीं से ऊंटों की उलटी गिनती शुरू हुई। इंदिरा गांधी नहर के आने, ओरण बंद होने, ग्रामीणों द्वारा ट्रेक्टर व परिवहन के अन्य साधनों का उपयोग करने से धीरे-धीरे ऊंट कम होते गए। नवीनतम पशु गणना 2012 की है जिसमें ऊंट की आबादी 3.25 लाख ही रह गई। देश के 80 प्रतिशत ऊंट राजस्थान में पाए जाते हैं। इनकी जैसलमेरी, बीकानेरी, मारवाड़ी और कच्छी किस्म है।
दूध व मीट के लिए करते हैं उपयोग
अफ्रीका व अरब देशों में ऊंट का उपयोग दूध व उसके बाद मीट के लिए करते हैं। इसके कारण वहां ऊंटों की आबादी में कोई फर्क नहीं पड़ा। देश में गुजरात में अमूल डेयरी ऊंट के दूध के उत्पादन में सहयोग कर रही है जबकि राजस्थान में ऊंट के दूध को लेकर कोई खास जागरुकता नहीं है। यह डायबिटीज में काम आता है। वर्तमान में ग्रामीण इलाकों में ऊंट का उपयोग उसके ऊंटगाडे के तौर पर रह गया है, जिसमें भी केवल पानी का परिवहन होता है। ओरण खत्म होने से ऊंट को खिलाना भारी पड़ता है। परिवहन के लिए वाहन आ गए हैं। खेतों की जुताई भी ट्रेक्टर से हो रही है।
यों समझें कम होती ऊंटों की आबादी
वर्ष -------- ऊंटों की संख्या (लाख में)
1951 -------- 3.41
1956 --------4.36
1961 --------5.70
1966 --------6.54
1972 --------7.45
1977 --------7.52
1983 --------7.56
1988 --------7.19
1992 -------- 7.46
1997 --------6.69
2003 --------4.98
2007 --------4.22
2012 --------3.25
(ये आंकड़े राजस्थान सरकार के राजस्व विभाग की पशु गणना के हैं।)
जैसलमेर में सर्वाधिक व प्रतानगढ़ में सबसे कम
जिला -------- ऊंटों की संख्या
जैसलमेर --------49917
बीकानेर --------46209
बाड़मेर --------43172
चूरू --------33959
हनुमानगढ़ --------31226
जोधपुर --------16749
नागौर --------10578
प्रतापगढ़ --------109
ऊंट को पालना अब आसान नहीं
प्रदेश में लगातार खत्म होते ओरण, इंदिरा गांधी नहर और मशीनी कार्य अधिक होने से ऊंट की जरूरत कम होने लगी है। ऊंट पालने में खर्चा अधिक होता है इसलिए लोग अब ऊंट नहीं पालते। इनकी संख्या कम होती जा रही है।
डॉ. आरके सावल, निदेशक, राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र, बीकानेर
Published on:
30 May 2019 10:54 am
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