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ओसियां विधानसभा क्षेत्र : प्रत्याशियों का सोशल इंजीनियरिंग पर फोकस, मुद्दों पर ध्यान नहीं

त्रिकोणीय संघर्ष से धोरों में घमासान, जातीय ध्रुवीकरण पर टिकी निगाहें  

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रमेश कुमार त्रिपाठी/ओसियां/जोधपुर. त्रिकोणीय संघर्ष से ओसियां के धोरों में इस बार घमासान मचा है। भाजपा के भैराराम सियोल जहां सीट बचाने की चुनौती से जूझ रहे हैं, वहीं कांग्रेस की दिव्या मदेरणा पर दादा परसराम मदेरणा से विरासत में मिली सीट पर फिर से काबिज होने की चुनौती है। कांग्रेस के बागी व निर्दलीय उम्मीदवार महेन्द्र सिंह भाटी दोनों प्रमुख दलों के नेताओं के समीकरण बिगाड़ रहे हैं। वर्ष 1957 में अस्तित्व में आई ओसियां विधानसभा सीट पर उस समय के लगातार दो चुनाव परसराम मदेरणा ने जीते। यह क्षेत्र कांग्रेस के अन्य दिग्गज नेता नरेन्द्र सिंह भाटी की राजनीतिक कर्मभूमि रही है। वे यहां से चार बार विधायक रहे। यह क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ रहा है। अब तक हुए 13 चुनावों में दस बार कांग्रेस ही जीती है। कांग्रेस ने यह सीट पुन: हथियाने के लिए परसराम मदेरणा की पोती दिव्या मदेरणा को टिकट देकर वंशवाद और मदेरणा परिवार का कार्ड खेला है। इधर महेन्द्र सिंह भाटी, नरेन्द्र सिंह भाटी का कार्ड इस्तेमाल कर दोनों को चुनौती दे रहे हैं। त्रिकोणीय संघर्ष की स्थिति में जीत के लिए निगाहे जातीय धु्रवीकरण पर टिकी हैं।

जातिगत राजनीति हावी, मुद्दे हुए हवा
- ओसियां विधानसभा क्षेत्र में दाखिल होते ही रामपुरा आता है। यहां के बांशिदे छोटूसिंह भाटी ने पर्यटकों की पीड़ा बयां करते हुए रामपुरा में मिड-वे की मांग उठाई। देसी-विदेशी पर्यटक खूब आते हैं मगर लंबे सफर के बाद अनुकूल विश्राम व अल्पाहार स्थल नहीं है।
- मथानिया में कन्हैयालाल राठी यहां विकास कार्य से संतुष्ट नजर आए मगर कृषि महाविद्यालय की मांग पूरी नहीं होने पर अफसोस जताया। कृषि बाहुल्य क्षेत्र में भूजल स्तर कम होने से किसान संकट में है।
- मथानियां के किसान रतनलाल डागा भी काश्तकारों के मुद्दों पर चिंतित नजर आए। बोले- ओसियां क्षेत्र को डार्क जोन घोषित कर दिया गया है। किसानों को न तो नया बिजली कनेक्शन मिल रहा है और न ही नए ट्यूबवेल खोद पा रहे हैं। पुराने खुदे ट्यूबवेल में पानी काफी नीचे चला गया। किसान इस दिशा में काम करने वालों को ही वोट देने के मानस में है।
- तिंवरी में सांवरलाल परिहार ने तिंवरी, बालरवा, बिंजवाडिय़ा, मांडियाई एवं घेवड़ा की सडक़ों की खराब हालत की ओर इशारा करते हुए सवाल उठाया कि क्या निर्वाचन के बाद किसी जनप्रतिनिधि को ये नजर नहीं आता।
- बालरवा के नरपत परिहार ने तिंवरी में बालिका महाविद्यालय एवं बालिका छात्रावास की जरूरत बताई और कहा कि मजबूरी में बालिकाएं शिक्षा से वंचित हो रही हैं।
- ओसियां तहसील रोड जो ओसियां कस्बे की मुख्य सडक़ है यहां गौरव पथ बनना था, लेकिन यहां से हटाकर तहसील कार्यालय से बाईपास तक बनाया गया। जिससे तहसील रोडवासी आज भी नाराज है।
- ओसियां को नगरपालिका बनाने, सीवर लाइन, जिलास्तरीय चिकित्सा सुविधा की दिशा में कोई विशेष प्रयास नहीं हुए।
- ओसियां में गंदे पानी की निकासी, रेलवे पुलिया बनाने, सरकारी स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे, जनता को मीठा पानी व कृषि के लिए नहरी पानी की मांग भी जोर-शोर से उठ रही है।

प्रत्याशियों का क्या है हाल
भैराराम चौधरी, भाजपा
ताकत: वर्तमान विधायक हैं। क्षेत्र में विकास कार्य, युवा वर्ग व जातिगत वोट बैंक, सरल स्वभाव।
कमजोरी: पर्यटन की दृष्टि से ओसियां में कोई उल्लेखनीय विकास कार्य व औद्योगिक क्षेत्र घोषित नहीं करवा पाना। जातिगत वोटों का धु्रवीकरण।

दिव्या मदेरणा, कांग्रेस
ताकत: युवा नेत्री, दादा, पिता एवं मां की राजनीतिक पहचान, समाज पर अच्छी पकड़।
कमजोरी: पहली बार चुनाव मैदान में। ज्यादा राजनीतिक अनुभव नहीं। जातिगत वोटों का बंटवारा।

महेन्द्रसिंह भाटी, निर्दलीय
ताकत: राजपूत वोट व कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक में सेंध। स्थानीय और सक्रिय नेता। गांव के सरपंच रहे।
कमजोरी: पार्टी द्वारा टिकट नहीं मिलना।

इनका कहना

जो प्रत्याशी महिला सुरक्षा, महिला छात्रावास, महिला पीजी कॉलेज व ओसियां को नगरपालिका बनाने की बात करेगा, उसे ही वोट देंगे।
मीना चौधरी

बेरोजगारों को रोजगार, बेरोजगारी भत्ता, खेलकूद स्टेडियम, रोजगार प्रशिक्षण केन्द्र व उद्योग खुलवाने का वादा करने वाले को समर्थन दिया जाएगा।
भंवरू खान

विस क्षेत्र प्रोफाइल

कुल मतदाता:-234365
मतदान केन्द्र:-246
प्रत्याक्षी:-5
पुरुष:-123228
महिला:-111137
मतदाता बढे:-33934

15 साल में यह रहे विधायक

2013-भैराराम सियोल, भाजपा
2008-महिपाल मदेरणा, कांगेेस
2003-बन्नेसिंह भाजपा