जोधपुर।
सीबीआइ ने तिब्बती मृग के बालों से निर्मित शॉल निर्यात करने के प्रयास के संबंध में जो एफआइआर दर्ज की है वो शॉल दो साल पहले नई दिल्ली के सीमा शुल्क विभाग (कस्टम) ने जब्त किए थे। इनमें से देहरादून स्थित वाइल्ड लाइफ संस्थान की जांच रिपोर्ट में चार शॉल तिब्बती मृग के बालों से निर्मित होने की पुष्टि हुई थी। कस्टम के सहायक आयुक्त की शिकायत पर सीबीआइ ने वन्य जीव संरक्षण अधिनियम में मामला दर्ज किया है।
सीबीआइ सूत्रों के अनुसार जैसलमेर स्थित मैसर्स लग्जरी हैण्डीक्राफ्ट्स की ओर से हस्त निर्मित पशमीना के 17 शॉल निर्यात करने के लिए 27 जून 2021 को दिल्ली भेजे थे। 4,95,045 रुपए का बिल बनाया गया था। 2 जुलाई 2021 को कस्टम ने माल की जांच की थी।इनमें से पांच शॉल संदिग्ध नजर आए थे। जो तिब्बती मृग के बालों से बने होने का अंदेशा था। 26 जुलाई 2021 को जांच के लिए पांचों शॉल देहरादून में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट भेजे गए थे।
7 मार्च 2022 को संस्थान से शॉल की जांच रिपोर्ट मिली थी। जिसमें पांच में से चार शॉल तिब्बती मृग के बालों से निर्मित होने की पुष्टि हुई थी। जबकि एक शॉल में ऐसे कोई तत्व नहीं पाए गए थे। कम्पनी को पता लगा तो कस्टम से दुबारा जांच करवाने का आग्रह किया गया था। तब शॉल को कोलकाता की जेडएसआइ में भेजे गए थे, लेकिन संस्थान के वैज्ञानिक डॉ मुकेश ठाकुर ने दुबारा जांच को उचित नहीं माना। वाइल्ड लाइफ संस्थान की जांच को पर्याप्त माना गया था।
इस पर कस्टम ने 19 दिसम्बर 2022 को हैण्डीक्राफ्ट कम्पनी को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया था, लेकिन कम्पनी ने इसमें रूचि नहीं ली थी।
अग्रिम कानूनी कार्रवाई के लिए कस्टम के सहायक आयुक्त छुट्टनलाल मीणा ने गत 3 अगस्त को सीबीआइ में लिखित शिकायत पेश की थी। जांच के बाद आरोप सही पाए जाने पर सीबीआइ दिल्ली की आर्थिक अपराध शाखा द्वितीय ने मैसर्स लग्जरी हैण्डीक्राफ्ट्स के खिलाफ एफआइआर दर्ज की थी। कम्पनी के ठिकानों पर दबिश देकर 23 शॉल जब्त भी किए गए थे।