
Celebrate Eid in the morning, afternoon Holi and Diwali at night
जोधपुर. राष्ट्रसंत महोपाध्याय ललितप्रभ सागर ( Saint Lalitprabhsagar ) ने कहा कि जैसे बिना पानी की नदी और बिना पैसे का पर बेकार है वैसे ही बिना प्रेम का परिवार व्यर्थ है। जिस घर में भाई-भाई, सास-बहू, देवरानी- जेठानी, पिता-पुत्र प्रेम और मिठास से रहते हैं वहां लक्ष्मी की कृपा कभी कम नहीं होती है। संतप्रवर गुरुवार को गांधी मैदान ( Gandhi Maidan ) में आयोजित सत्संगमाला ( Satsangmala ) में परिवार सप्ताह के चौथे दिन कैसे घोलें रिश्तों में प्रेम और मिठास विषय पर जनमानस को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि परिवार की ताकत सुंदर मार्बल, महंगा फर्नीचर, सोफासेट, आकर्षक पेन्टिंग, बड़ी एलसीडी और मुलायम गद्दे नहीं ,बल्कि परस्पर प्रेम, आत्मीयता, त्याग और सहयोग की भावना होती है।
संतप्रवर ने कहा कि वैसे तो साल में ईद, होली और दिवाली एक बार ही आती है, पर जिस घर में भाई-भाई सुबह उठ कर के आपस में गले मिलते हैं, दोपहर में देवरानी और जेठानी साथ साथ भोजन करते हैं और शाम को सोने से पहले बेटे-बहू मां बाप की सेवा करके सोते हैं वहां रोज सुबह ईद ( Eid ), दोपहर होली ( Holi )और रात खुशियों से भरी दिवाली ( Diwali ) जाती है।
उन्होंने कहा कि अगर आपके घर में भाइयों के बीच धन का बंटवारा हो रहा हो तो सबसे पहले आप अपना हिस्सा मांगना और कहना कि आप सब कुछ ले लीजिए, पर माता-पिता की सेवा मेरे हिस्से में दे दीजिए। जहां बड़े- बुजुर्गों को खुशियां दी जाती है वह घर धरती का सबसे अमीर होता है वहीं जिस घर में पांच बेटे बहुओं के होते हुए भी मां को अपने हाथों से खाना बना कर खाना पड़ता हो वह घर नरक से भी ज्यादा बदतर हो जाता है।
संतप्रवर ने कहा कि घर में मंदिर बनाने से पहले जरूरी है घर को ही मंदिर बनाना। हम मंदिर में 10 मिनट रहते हैं, स्थानक में आधा घंटा रहते हैं और सत्संग में एक घंटा रहते हैं, पर घर में 24 घंटे बिताते हैं इसलिए हमें अपने धर्म की शुरुआत मंदिर या धर्मस्थान से करने के बजाय घर से करनी चाहिए।
संत प्रवर ने कहा कि लोग दादा-दादी के मरने पर तो सगे-संबंधियों को चार मिठाइयां खिलाकर जीमण करते हैं, पर उन्हें जीते जी सुख की दाल-रोटी भी नहीं खिलाते हैं। क्या ऐसा दिखावा करना हमारे लिए कलंक की बात नहीं है?
उन्होंने कहा कि रिश्तों में प्रेम घोलने का पहला मंत्र देते हुए संतप्रवर ने बेटे-बहुओं कहा कि माता-पिता और सास-ससुर की सेवा सौभाग्य मानकर करें। वे जैसे भी हैं उनको निभा लें। जब हम बच्चे थे तो उन्होंने हमें सहारा दिया था अब वे बूढ़े हो गए हैं तो हम उनका सहारा क्यों नहीं बन पा रहे हैं।उन्होंने हमारी जवानी को सुखभरा बनाया, हमें चाहिए कि हम उनके बुढ़ापे को सुखभरा बनाएं। संतान का सुख तो सबको मिलता है, पर वे घर ज्यादा पुण्यशाली होते हैं जहां संतान से भी सुख मिला करता है।
संतप्रवर ने बहनों से कहा कि अगर आप श्रवण कुमार की मां बनना चाहती है तो उसका एक ही मंत्र है पहले अपने पति को श्रवण कुमार बनाइए क्योंकि हमारी संतानें हमारे साथ वैसे ही पेश आएगी जैसे हम अपने मां बाप के सामने पेश आएंगे।
उन्होंने कहा कि अगर आप चाहते हैं कि आपके पीहर में आपकी भाभी आपकी मां की सेवा करे तो पहले जरूरी है कि आप ससुराल में अपनी सासू मां की सेवा करें। उन्होंने सासु माताओं से कहा कि अगर आप चाहते हैं कि आपकी बेटी ससुराल में खुश रहे तो पहले जरूरी है कि आप अपनी बहू को खुश रखें। जहां सास और बहू एक ही थाली में खाना खाती है और प्रेम से रहती है उस घर पर महावीर और महादेव के आशीर्वाद सदा बरसते रहते हैं। इस दौरान जब संतप्रवर ने सगे भाइयों को मंच पर बुलाकर आपस में गले लगवाया तो माहौल भावपूर्ण बन गया। चलते प्रवचन में संतप्रवर ने मैदान में बैठे हजारों बेटे-बहुओं के सामने अपनी झोली फैलाकर गुरु दक्षिणा मांगी कि वे सदा माता पिता की सेवा करने के लिए संकल्प बंद्ध रहेंगे जिसे सबने गुरु आज्ञा मानकर संकल्प शिरोधार्य किया।
प्रवचन के पश्चात 23वें तीर्थंकर भगवान पारसनाथ के मोक्ष कल्याणक पर सभी श्रद्धालुओं ने लड्डू चढ़ाने का सौभाग्य लिया और सामूहिक रूप से पारस इकतीसा का संगायन हुआ। कार्यक्रम में 9 उपवास करने वाली बाल कन्याएं हर्षिता जैन और वर्षा जैन को चातुर्मास समिति के नीलम मेहता, मधु पारख, सुमित्रा वडेरा, किरण मानधना द्वारा माल्यार्पण और साहित्य देकर अभिनंदन किया गया। प्रवचन में साहित्य की प्रभावना गिरीश कुमार सुधा देवी भंडारी परिवार द्वारा दी गई।
चातुर्मास समिति के सोहनलाल वडेरा ने बताया कि शुक्रवार को संत चंद्रप्रभ गांधी मैदान में सुबह 8:45 बजे नई पीढ़ी को कैसे दें सही संस्कार विषय पर विशेष प्रवचन देंगे।
Published on:
08 Aug 2019 11:59 pm

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