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जोधपुर

तंत्र क्रिया के बाद चामुण्डा माता की मूर्ति चुराई, मौके पर मिली यह सामग्री …

- मूर्ति व चोर की तलाश के लिए 70 पुलिसकर्मी जुटे, ड्रॉन उड़ाया, नागादड़ी में एडीआरएफ के गोताखोर उतारे

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जोधपुर।
मण्डोर उद्यान के ऊपर स्थित प्राचीन चामुण्डा माता मंदिर से चोरों ने मां चामुण्डा की मूर्ति चुरा ली। गुप्त नवरात्रा की अष्टमी से कुछ घंटे पहले मूर्ति चोरी से श्रद्धालुओं में रोष व्याप्त हो गया। मूर्ति स्थल पर काला कपड़ा चिपकाने, दीपक जले होने व प्लास्टिक बोतल में गौ-मूत्र मिलने से पुलिस को अंदेशा है कि चोरों ने तांत्रिक क्रिया भी की होगी। मूर्ति व चोरों की तलाश में 60-70 पुलिसकर्मी लगाए गए हैं। ड्रॉन के साथ ही एसडीआरएफ के जवानों ने नागादड़ी में तलाशी ली, लेकिन मूर्ति नहीं मिली।
थानाधिकारी विक्रम सिंह चारण ने बताया कि उद्यान के ऊपरी भाग में प्राचीन चामुण्डा माता का मंदिर है। गुप्त नवरात्रि की अष्टमी के चलते शनिवार सुबह श्रद्धालु मंदिर पहुंचे, जहां चामुण्डा माता मंदिर की मूर्ति स्थल पर टेप से काला कपड़ा चिपकाया हुआ था। दीपक जल रहे थे। श्रद्धालुओं ने कपड़ा हटाया तो चामुण्डा माता की मूर्ति नजर नहीं आई। वहां पत्थर के टुकड़े पड़े थे। इससे श्रद्धालुओं के पैरों तले जमीन खिसक गई। मूर्ति चोरी का पता लगते ही आस-पास के श्रद्धालु मौके पर एकत्रित हो गए। पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। पुलिस ने चोरी का मामला दर्ज कर चोर व मूर्ति की तलाश शुरू की है। फिलहाल कोई सुराग नहीं लग पाया है।
जलाशय के अंदर से लेकर ड्रॉन तक से तलाश
पुलिस ने एफएसएल और डॉग स्क्वॉयड को भी बुलाकर साक्ष्य एकत्रित करवाए हैं। डॉग स्क्वॉयड को भी क्षेत्र में सक्रिय किया गया। पास ही प्राचीन जलाशय नागादड़ी है। उसमें मूर्ति होने की आशंका पर एडीआरएफ के गोताखोर बुलाकर नागादड़ी में तलाश करवाई गई। ड्रॉन उड़ाकर आस-पास के क्षेत्र में तलाश की गई। इसके साथ ही पुलिस के 60-70 जवानों को भी तलाश में लगाया गया है, लेकिन अभी तक मूर्ति का पता नहीं लग पाया है।
तांत्रिक क्रिया कलापों के बाद मूर्ति चोरी का अंदेशा
मूर्ति स्थल पर काला कपड़ा टेप से चिपकाया हुआ था। पास ही दीपक जलाए गए थे। प्लास्टिक की बोतल में गौ-मूत्र भी मिला। इससे अंदेशा है कि चोरों ने मूर्ति से पहले तांत्रिक क्रिया भी की है।
श्रद्धालुओं ने बाहर की आरती पूजा की
गुप्त नवरात्रा और अष्टमी होने के चलते मंदिर में सुबह सुबह अनेक श्रद्धालु पहुंच गए। मूर्ति चोरी के प्रति विरोध व रोष जताया। पुलिस के आग्रह पर श्रद्धालुओं ने मंदिर के बाहर ही आरती व पूजा अर्चना की।
मेहरानगढ़ के मंदिर में स्थापित की थी मंदिर की मूर्ति
जानकारों का कहना है कि छठी शताब्दी में प्रतिहार राजा हरिचंद्र ने मण्डोर दुर्ग की स्थापना की गई थी। इस मंदिर में चामुण्डा माता की प्राचीन मूर्ति स्थापित थी। 14वीं शताब्दी तक प्रतिहार राजा का राज रहा। फिर राव जोधा ने जोधपुर की स्थापना की थी। इस मंदिर की चामुण्डा माता की मूर्ति को मेहरानगढ़ में चामुण्डा माता मंदिर में स्थापित कर दी गई थी। मण्डोर के मंदिर में चामुण्डा माता की दूसरी मूर्ति स्थापित की गई थी।