
Ayurveda: डॉक्टर के कौशल पर निर्भर करता है मरीज की नाड़ी देखना
जोधपुर. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन् राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर क्रिया शारीर विभाग की ओर से मंगलवार से दो दिवसीय नाड़ी परीक्षण विषयक कार्यशाला का आगाज किया गया। कार्यशाला में देशभर से 250 से अधिक से प्रतिभागी शामिल हुए।
विवि कुलपति प्रो. प्रदीप कुमार प्रजापति ने अपने संबोधन में कहा कि नाड़ी परीक्षण एकमात्र ऐसी विधा है जिससे रोगी के दोष, धातु, मल की स्थिति का पता कर रोग की प्रकृति एवं विकृति का पता लगाया जाता है। आयुर्वेदीय शास्त्रीय ग्रंथों में त्रिदोषों के आकलन में नाड़ी परीक्षण का महत्व है। नाड़ी परीक्षण चिकित्सक के कौशल पर अत्यधिक निर्भर है। आयुर्वेद के सन्दर्भ में नाड़ी ज्ञान का वैज्ञानिक रूप से विश्लेषण करने के लिए युगानुरूप में अनुसन्धान की आवश्यकता है।
कार्यशाला के प्रथम दिन मुंबई के पूर्व प्रोफेसर डॉ. विनायक विट्टल तायड़े ने नाड़ी परीक्षा की विधि का प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया। कुलसचिव प्रो. गोविन्द सहाय शुक्ल ने कहा कि बीएएमएस प्रथम वर्ष से ही विद्यार्थियों को नाडी परीक्षण सम्बन्धी प्रशिक्षण देना चाहिए। आयोजन सचिव डॉ दिनेश चंद्र शर्मा ने बताया कि महानगर आयुर्वेद सेवा संघ नासिक के सहयोग आयोजित कार्यशाला में देशभर के विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। प्राचार्य एवं कार्यशाला आयोजन अध्यक्ष प्रो. महेन्द्र कुमार शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
Published on:
02 Apr 2024 08:31 pm
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