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बच्चे अब कॉमिक्स पढऩे के साथ देख सकेंगे उसकी मूवी भी

- आइआइटी जोधपुर ने ई-कॉमिक्स को वीडियो में बदलने का सॉफ्टवेयर विकसित किया- देश की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को सहेजने की पहल

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बच्चे अब कॉमिक्स पढऩे के साथ देख सकेंगे उसकी मूवी भी

बच्चे अब कॉमिक्स पढऩे के साथ देख सकेंगे उसकी मूवी भी

जोधपुर. कॉमिक्स रीडिंग अनुभव को मजेदार, इंटरएक्टिव और आकर्षक बनाने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) जोधपुर के शोधकर्ताओं ने डिजिटल कॉमिक्स को वीडियो में बदलने का सॉफ्टवेयर विकसित किया है। यह कॉमिक्स के डिजिटलाइज संस्करण को मूवी में तब्दील कर देगा, जिससे बच्चे और बड़े अपने अपनी पसंदीदा डिजिटल कॉमिक्स को वीडियो रूप में भी देख पाएंगे। यह एक ऑडियो-वीडियो स्टोरी बुक की तरह काम करेगी। आइआइटी जोधपुर का सॉफ्टवेयर विकसित करने का मुख्य उद्देश्य देश की सांस्कृतिक विरासत को सहेजना है। आजकल अधिकांश बच्चे और बड़े किताबें पढऩे की बजाय मोबाइल में ई-बुक, कॉमिक्स और एनिमेटेड चीजें देखते हैं। इस सॉफ्टवेयर के जरिए रामायण, गीता, महाभारत, पुराण, उपनिषद्, ब्राह्मण, आरण्यक जैसे देश के धरोहर ग्रंथों को ई बुक में बदलकर अथवा इनके डिजिटल एडिशन को वीडियो में तब्दील करके यू-ट्यूब जैसे चैनल पर मुहैया करवाया जाएगा। इससे बच्चे सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें।

कॉमिक्स के बैलून के टेक्सट बोलेंगे
आइआइटी जोधपुर ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, मशीन लर्निंग, कम्प्यूटर विजन की सहायता से कॉमिक टू वीडियो नेटवर्क (सीटूवी नेट) विकसित किया है। सामान्यतया एक कॉमिक्स में कई वर्गाकार खाने होते हैं जिनमें पटकथा चलती है। इन चौकोर खानों में चित्र के साथ टेक्सट मैसेज भी होता है जो बैलून रूप में होता है। सॉफ्टवेयर की मदद से पैनल टू पैनल इन चित्रों को जोड़ा जाएगा और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की सहायता से बैलून में लिखे टेक्सट को वॉइस में बदला जाएगा। अकेला सॉफ्टवेयर डिजिटल बुक को मूवी में बदल लेगा। अगर पुस्तक फिजिकल रूप में उपलब्ध है तो पहले उसको ई-बुक में बदलकर बाद में उसकी भी मूवी बना सकते हैं। वर्तमान में पुस्तकों की हुबहू मूवी नहीं बनती है वरन् उनके एनिमेशन काम में लेकर वीडियो बनाते हैं जो वास्तविक तौर से भिन्न होते हैं।

सॉफ्टवेयर में दो आंतरिक नेटवर्क को किया उपयोग

पैनल से वीडियो निर्माण के लिए दो आंतरिक नेटवर्क उपयोग लिए गए हैं। सीपीईनेट 97 प्रतिशत से अधिक सटीकता देता है। स्पीच बैलून सेगमेंटेशन मॉडल एसबीएसनेट कम मापदंडों के साथ 98 प्रतिशत सटीकता देता है। वर्तमान में दुनिया में इस तरह का उन्नत सॉफ्टवेयर नहीं है।
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‘सीटूवी नेट के जरिए हमारा उद्देश्य देश की सांस्कृतिक विरासत, धरोहर और संस्कृति को सहेजना है। आने वाली पीढ़ी पुस्तकों के टेक्सट को वीडियो रूप में आसानी से समझ सकेंगी।’
- डॉ चिरंजॉय चट्टोपाध्याय, कंप्यूटर विज्ञान विभाग, आइआइटी जोधपुर