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जयपुर की घटना के बाद शैक्षिक महासंघ का आया बयान, बोले- शिक्षा के मंदिरों को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने देंगे

जयपुर में CJP कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों के बीच हुए विवाद के बाद अब सरकारी स्कूलों में बाहरी हस्तक्षेप और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर बहस तेज हो गई है। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने राजकीय विद्यालयों में अनधिकृत प्रवेश और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर आपत्ति जताई है।
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Jodhpur: अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (फोटो-पत्रिका नेटवर्क)

जोधपुर। जयपुर जिले में CJP कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों के बीच हुए विवाद के बाद अब अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। महासंघ ने सरकारी स्कूलों में बाहरी और राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर आपत्ति जताते हुए कहा कि शिक्षा के मंदिरों को किसी भी कीमत पर राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने दिया जाएगा। हालांकि संगठन ने विवाद के दौरान हुई कथित मारपीट और हिंसा का समर्थन नहीं किया है।

महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष संजीव व्यास ने शनिवार को जोधपुर में प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका और कुछ कार्यकर्ताओं की ओर से राजकीय विद्यालय में निरीक्षण का प्रयास किया गया था। इसका स्थानीय ग्रामीणों ने विरोध किया। इसी दौरान विवाद बढ़ा और कथित तौर पर गाली-गलौज तथा मारपीट की स्थिति पैदा हुई।

स्कूलों में दखल पर जताई आपत्ति

महासंघ ने स्पष्ट किया कि किसी भी विवाद का समाधान हिंसा नहीं हो सकता। संगठन मारपीट की घटना का समर्थन नहीं करता, लेकिन उसका कहना है कि सरकारी विद्यालयों को राजनीतिक गतिविधियों और अनधिकृत हस्तक्षेप से दूर रखना जरूरी है।

महासंघ के मुताबिक, यदि किसी व्यक्ति, संगठन या समूह को किसी सरकारी स्कूल की व्यवस्था, मूलभूत सुविधाओं, शिक्षकों की स्थिति अथवा शिक्षा के स्तर को लेकर शिकायत है तो उसके लिए शिक्षा विभाग और प्रशासन के निर्धारित माध्यम मौजूद हैं। शिकायतों को उन्हीं माध्यमों से उठाया जाना चाहिए, ताकि स्कूल का माहौल प्रभावित न हो।

संघ ने यह भी कहा कि शिक्षक किसी भी ऐसे व्यक्ति के स्कूल में प्रवेश का विरोध करेंगे, जिसका वहां आना अधिकृत प्रक्रिया के तहत नहीं है। संगठन का तर्क है कि यह व्यवस्था किसी एक व्यक्ति या संगठन के लिए नहीं, बल्कि सभी के लिए समान होनी चाहिए।

सरकार के दिशा-निर्देशों का समर्थन

महासंघ ने सरकारी विद्यालयों में बाहरी और राजनीतिक हस्तक्षेप रोकने के लिए जारी दिशा-निर्देशों का समर्थन किया। संजीव व्यास ने कहा कि इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य स्कूलों में सुरक्षित, अनुशासित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है। उन्होंने कहा कि स्कूलों की व्यवस्था को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखना जरूरी है।

महासंघ ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की ओर से शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी समर्थन किया। संगठन का कहना है कि सरकारी स्कूलों में संसाधनों और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए लगातार काम किया जा रहा है।

10 हजार स्कूलों में शिक्षक कर रहे काम

संजीव व्यास ने बताया कि महासंघ सरकारी विद्यालयों को शिक्षा के केंद्र और ‘तीर्थ’ के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। संगठन से जुड़े शिक्षक स्कूलों में भौतिक संसाधन जुटाने और शैक्षणिक स्तर बेहतर करने के प्रयास कर रहे हैं। उनके अनुसार राजस्थान के करीब 10 हजार स्कूलों में महासंघ से जुड़े शिक्षक इस दिशा में सक्रिय हैं।

उन्होंने बताया कि जर्जर सरकारी स्कूलों के भवनों और व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए भी सरकार की ओर से योजना तैयार की गई है। महासंघ का कहना है कि स्कूलों की समस्याओं पर चर्चा और समाधान जरूर होना चाहिए, लेकिन इसके लिए निर्धारित संस्थागत व्यवस्था का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

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